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Twisha Sharma Case: रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह CBI की गिरफ्त में; 14 तीखे सवालों से खुलेगा मौत का राज?

भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI की जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में गिरफ्तार की गईं रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट ने 5 दिन की CBI रिमांड पर भेजा है। एजेंसी अब इस मामले की परतें खोलने के लिए गिरिबाला सिंह और मामले के अन्य आरोपी समर्थ सिंह से आमने-सामने पूछताछ करने की तैयारी में है।

❓ CBI के 14 तीखे सवाल: गिरिबाला सिंह से क्या जानना चाहती है एजेंसी?

जांच एजेंसी ने रिटायर्ड जज से कुल 14 बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें प्रमुख सवाल हैं:

  • घटना की सूचना पुलिस को कब और कैसे दी गई?

  • CCTV सिस्टम का समय 2 घंटे 20 मिनट पीछे क्यों चल रहा था?

  • क्या घटना के बाद किसी डिजिटल साक्ष्य या रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की गई?

  • FIR के बाद आरोपी समर्थ सिंह के साथ क्या कोई संपर्क हुआ था?

  • घटना के समय मौके पर सबसे पहले कौन पहुंचा था?

⏳ 54 मिनट का रहस्य और ‘वर्चुअल टनल व्यू’

CBI की पूरी जांच FIR के उस अहम समय पर टिकी है, जब रात 9:41 बजे ट्विशा की आखिरी बार अपने परिवार से बात हुई थी और 10:35 बजे उनकी मृत्यु की सूचना दी गई। इस 54 मिनट के दौरान घर में क्या हुआ, इसे समझने के लिए CBI ‘वर्चुअल टनल व्यू’ (Virtual Tunnel View) तकनीक का उपयोग कर रही है। एजेंसी घर के भीतर की गतिविधियों को डिजिटल तरीके से रीक्रिएट कर रही है ताकि हर मिनट का सही घटनाक्रम सामने आ सके।

💻 डिजिटल फॉरेंसिक का सहारा

CBI ने जांच को पुख्ता बनाने के लिए फॉरेंसिक मैपिंग, वाई-फाई लॉग्स, और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को एक साथ सिंक्रोनाइज (Synchronize) किया है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में बदलाव किया गया था। कैमरों के टाइमस्टैम्प और मोबाइल डेटा का मिलान कर एजेंसी एक सिम्युलेटेड वॉकथ्रू तैयार कर रही है, जिससे बयानों में मौजूद विरोधाभासों को साफ तौर पर समझा जा सकेगा।

संपादकीय टिप्पणी: यह मामला भोपाल के कानूनी और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। CBI की यह हाईटेक जांच आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे कर सकती है। क्या आपको लगता है कि तकनीक के जरिए इस मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी?