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झारखंड में भी जनगणना का पहला दौर एक मई से प्रारंभ हुआ

अपने मोबाइल से दर्ज कर सकते हैं जानकारी

  • तकनीक के माध्यम से भागीदारी

  • ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और अंतराल

  • इसरो के मैप पर आधारित काम

राष्ट्रीय खबर

रांचीः रांची: भारत की जनसांख्यिकीय तस्वीर को आधुनिक रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, झारखंड में देशव्यापी जनगणना के प्रथम चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है। इस महत्वपूर्ण अभियान के शुभारंभ के अवसर पर रांची प्रेस क्लब में एक विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रांची नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए जनगणना की बारीकियों, इसकी डिजिटल प्रकृति और कार्यान्वयन की रणनीति साझा की।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार की जनगणना का सबसे विशिष्ट पहलू स्व-गणना है। यह विकल्प उन नागरिकों के लिए है जो स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। वे स्वयं पोर्टल या ऐप के माध्यम से अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं। डिजिटल फॉर्म भरते समय नाम और मोबाइल नंबर की सटीकता पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, ई-मेल आईडी का विकल्प भी दिया गया है ताकि भविष्य में सरकार से संबंधित सूचनाएं और पावती सीधे नागरिकों को प्राप्त हो सकें।

जिन परिवारों के पास स्मार्टफोन की सुविधा नहीं है, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे घरों में प्रशिक्षित प्रगणक स्वयं पहुंचेंगे और पारंपरिक तरीके से डिजिटल उपकरणों की सहायता से डेटा एकत्रित करेंगे।

भारत में जनगणना का इतिहास काफी पुराना है, जिसकी विधिवत शुरुआत 1881 में हुई थी। तब से हर 10 साल में यह प्रक्रिया निर्बाध रूप से चलती आ रही है। हालांकि, यह वर्तमान जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह स्वतंत्र भारत की 8वीं जनगणना है और पहली बार इसे पूरी तरह डिजिटल स्वरूप में संचालित किया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2021 में होने वाली इस गणना को कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण स्थगित करना पड़ा था। अब इसे नए उत्साह और तकनीक के साथ शुरू किया गया है, जिसे अगले वर्ष तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है।

अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सभी एकत्रित आंकड़े एनआईसी प्रोटोकॉल के तहत सुरक्षित रखे जाएंगे। सुरक्षा के कड़े प्रावधान सुनिश्चित करते हैं कि डेटा की चोरी या किसी भी प्रकार का दुरुपयोग न हो सके।

इस पूरी प्रक्रिया का एक बेहतर पक्ष यह भी है कि इस बार की डिजिटल जनगणना में इसरो के मैप का इस्तेमाल किया जा रहा है। वरना इससे पूर्व कई बार गूगल मैप के इस्तेमाल से होने वाली गलतियों का नमूना हमें अरुणाचल में देखने को मिला है, जहां का एक इलाका गूगल की वजह से चीन का इलाका दर्शाया गया था। जनगणना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि ये आंकड़े केवल संख्या मात्र नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। किस क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य या बुनियादी ढांचे की अधिक आवश्यकता है, इसका सटीक निर्धारण इन्हीं आंकड़ों से होता है। सरकार की भावी कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में यह डेटा मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।