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आम आदमी पार्टी के सात सांसद भाजपा में

काफी पहले से मिल रहे थे इस बदलाव के स्पष्ट संकेत

  • राघव चड्डा ने खुद जानकारी दी

  • अशोक मित्तल के यहां पड़ा था छापा

  • संजय सिंह ने कहा ऑपरेशन लोट्स है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आम आदमी पार्टी के भीतर एक बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत मिलते हुए, पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आज एक सनसनीखेज घोषणा की। चड्ढा ने साझा किया कि वह आम आदमी पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। यह घटनाक्रम न केवल राघव चड्ढा के व्यक्तिगत पाला बदलने तक सीमित है, बल्कि इसमें राज्यसभा में आप के सांसदों का एक बड़ा गुट भी शामिल है, जो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

राघव चड्ढा ने मीडिया को संबोधित करते हुए दावा किया कि राज्यसभा में आप के लगभग दो-तिहाई सांसद भाजपा के साथ जुड़ने जा रहे हैं। चड्ढा के अलावा जिन सांसदों के भाजपा में शामिल होने की पुष्टि की गई है, उनमें प्रमुख नाम स्वाति मालीवाल, क्रिकेटर से राजनेता बने हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी के हैं। वर्तमान में राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें से अधिकांश पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भावुक होते हुए राघव चड्ढा ने कहा, मैंने अपने जीवन के 15 साल इस पार्टी को दिए हैं, लेकिन आज वह पार्टी अपनी उस ईमानदार राजनीति की राह से भटक गई है जिसके लिए इसे बनाया गया था। मैं एक गलत पार्टी में सही आदमी था। अब मैं पार्टी से दूर और जनता के करीब जा रहा हूँ। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार विरोधी मूल सिद्धांतों से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाया।

यह सामूहिक दलबदल ऐसे समय में हुआ है जब कुछ सप्ताह पहले ही चड्ढा को राज्यसभा में आप के उप-नेता पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया गया था। कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व के साथ बढ़ते मतभेदों और आंतरिक कलह ने इस अलगाव की जमीन तैयार की।

दूसरी ओर, इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आप नेता संजय सिंह ने इसे भाजपा का ऑपरेशन लोटस करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा पंजाब की भगवंत मान सरकार के अच्छे कार्यों को बाधित करने के लिए घिनौनी राजनीति कर रही है। हालांकि, इतने बड़े स्तर पर सांसदों का जाना पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।