जन्मजात नागरिकता पर अपने पुराने तेवर में नजर आये
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विवादास्पद टिप्पणियाँ और नस्लवादी आरोप
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ट्रंप का पुराना रुख और कानूनी संघर्ष
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अभी मामला अदालत में चल रहा है
वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर जन्मजात नागरिकता के मुद्दे पर देश में नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर राजनीतिक विश्लेषक और रेडियो होस्ट माइकल सैवेज के पॉडकास्ट सैवेज नेशन को साझा किया। इस पॉडकास्ट में भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों के संदर्भ में अत्यंत आपत्तिजनक और नस्लवादी भाषा का उपयोग किया गया है, जिसने कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
साझा किए गए पॉडकास्ट में माइकल सैवेज ने भारत और चीन जैसे देशों को नरक का द्वार बताते हुए प्रवासियों पर कड़ा हमला बोला। सैवेज ने आरोप लगाया कि इन देशों के लोग केवल बर्थ टूरिज्म के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं, ताकि गर्भावस्था के अंतिम समय में यहाँ बच्चा पैदा कर उसे तत्काल अमेरिकी नागरिकता दिला सकें। उन्होंने आगे बढ़कर भारतीय और चीनी प्रवासियों को लैपटॉप वाले गैंगस्टर करार दिया और दावा किया कि इन लोगों ने अमेरिकी ध्वज का अपमान किया है और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है।
सैवेज का तर्क है कि अमेरिका का 14वां संशोधन, जो यहाँ जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता की गारंटी देता है, अब पुराना हो चुका है। उनके अनुसार, जब संविधान लिखा गया था तब आधुनिक तकनीक, इंटरनेट और हवाई यात्रा जैसी सुविधाएँ मौजूद नहीं थीं, जिसका अब दुरुपयोग किया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से बर्थराइट सिटीजनशिप को खत्म करने के पक्षधर रहे हैं। जनवरी 2025 में राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के तुरंत बाद, उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का उद्देश्य उन बच्चों को स्वतः नागरिकता मिलने से रोकना है जिनके माता-पिता वैध अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं हैं।
वर्तमान में यह नीतिगत बदलाव एक बड़े कानूनी विवाद का विषय है। ट्रंप बनाम बारबरा के नाम से यह मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि अदालत उनके खिलाफ फैसला सुनाती है, तो यह अमेरिका की गरिमा के लिए बड़ी क्षति होगी। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि संविधान का 14वां संशोधन इस अधिकार की स्पष्ट व्याख्या करता है, जिसे बदलना आसान नहीं होगा।
भारत और चीन जैसे देशों के खिलाफ की गई इन अपमानजनक टिप्पणियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद संतुलित और संक्षिप्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा, हमने इस संबंध में कुछ रिपोर्टें देखी हैं। मैं इस विषय को यहीं छोड़ता हूँ। भारत सरकार ने इस अपमानजनक पोस्ट पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है, जो संभवतः अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंधों की संवेदनशीलता को देखते हुए एक सोची-समझी कूटनीतिक चुप्पी है।