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पूर्व डीजीपी ने पुलिस के खिलाफ ही मोर्चा खोला

केरल में चुनाव की गर्मी में राजनीतिक बयानबाजी तेज

  • अलग अलग प्रदर्शनों में शामिल हुए दोनों

  • माकपा के आतंक का खिलाफ मोर्चाबंदी

  • मंदिर परिसर का दरवाजा लात से तोड़ा गया

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक हिंसा और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। पिनाराई विजयन सरकार की पुलिस द्वारा कथित आपातकाल जैसी ज्यादतियों के खिलाफ भाजपा के संघर्ष की कमान इस बार दो पूर्व पुलिस महानिदेशकों टी.पी. सेन कुमार और आर. श्रीलेखा – ने संभाली है। 21 अप्रैल को हुए इन प्रदर्शनों ने राज्य की राजनीति और पुलिस बल के भीतर एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है, जहाँ पूर्व पुलिस प्रमुख ही वर्तमान पुलिस व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं।

पूर्व डीजीपी टी.पी. सेन कुमार ने विश्व हिंदू परिषद, हिंदू ऐक्य वेदी और क्षेत्र संरक्षण समिति जैसे संगठनों के विरोध मार्च का नेतृत्व किया। यह विरोध प्रदर्शन इडप्पझिंजी स्थित बालसुब्रमण्यम मंदिर परिसर में पुलिस के कथित जबरन प्रवेश के खिलाफ था। आरोप है कि पुलिस ने मंदिर परिसर के उस भवन का दरवाजा लात मारकर तोड़ा जहाँ धार्मिक कक्षाएं चलती हैं, ताकि वहां मौजूद भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा सके।

दूसरी ओर, केरल की पहली महिला डीजीपी और अब भाजपा की राज्य उपाध्यक्ष आर. श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम की महिला पार्षदों के महिला मार्च का नेतृत्व किया। वट्टियूरकावू पुलिस स्टेशन के बाहर दिए गए उनके भाषण ने सभी को चौंका दिया। श्रीलेखा, जो स्वयं 33 वर्षों तक पुलिस बल का हिस्सा रही हैं, प्रदर्शन के दौरान बेहद तीखी भाषा का प्रयोग करती नजर आईं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को वर्दीधारी गुंडे और पिनाराई के लंपट तक कह डाला। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि भाजपा कार्यकर्ताओं को हाथ लगाया गया, तो पुलिसकर्मी सड़कों पर सुरक्षित नहीं चल पाएंगे।

चुनावी रंजिश और पुलिस कार्रवाई श्रीलेखा ने बाद में फेसबुक पर अपनी कठोर भाषा का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि वट्टियूरकावू सीआई विपिन के नेतृत्व में पुलिस टीम पिछले एक महीने से, विशेष रूप से चुनाव प्रचार के दौरान, भाजपा कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा के इशारे पर भाजपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है। 19 अप्रैल को मंदिर में हुई पुलिसिया कार्रवाई को उन्होंने इस हिंसा की पराकाष्ठा बताया।

श्रीलेखा के अनुसार, पुलिस ने उस भाजपा कार्यकर्ता को ही बुरी तरह पीटा जिसने माकपा कार्यकर्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। गंभीर रूप से घायल वह कार्यकर्ता अभी भी अस्पताल में भर्ती है। उल्लेखनीय है कि श्रीलेखा वट्टियूरकावू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार भी थीं। इस मामले ने केरल में पुलिस की निष्पक्षता और राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।