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अलीपुर में आग से जल गये चार हजार ईवीएम

मीडिया और सरकार ने घटना को छिपाने का प्रयास किया था

  • बीच की मंजिलों में आग नहीं लगी

  • छलांग मार कर आग ऊपर गयी है

  • मंत्री ने कहा सामान्य घटना नहीं है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के अलीपुर स्थित एक सरकारी इमारत में लगी भीषण आग ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस अग्निकांड में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल की गईं लगभग 4,000 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें जलकर नष्ट हो गई हैं।सूचना के अनुसार, आग में करीब 4,000 बैलेट यूनिट, 4,000 कंट्रोल यूनिट और 4,000 वीवीपैट मशीनें जल गईं। ये मशीनें दक्षिण बंगाल के 10 प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित थीं, जिनमें कस्बा, जादवपुर, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम, मेटियाब्रुज, सतगछिया और डायमंड हार्बर शामिल हैं।

दो दिन के बाद पश्चिम बंगाल के मंत्री कौशिक चौधरी ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद इसे सामान्य आग मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा, हम यह जांच रहे हैं कि क्या यह कोई तोड़फोड़ (सबोटाज) है। यह स्पष्ट नहीं है कि आग नौवीं और दसवीं मंजिल तक कैसे पहुंची।

जांचकर्ताओं के लिए आग लगने का तरीका भी एक पहेली बना हुआ है। आग चौथी और पांचवीं मंजिल से शुरू होकर सीधे नौवीं और दसवीं मंजिल तक फैल गई, जबकि बीच की तीन मंजिलें (छठी, सातवीं और आठवीं) काफी हद तक सुरक्षित रहीं। आशंका जताई जा रही है कि आग सीढ़ियों के जरिए ऊपर तक पहुंची। इस आग में जिला परिषद और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इसी आग में तृणमूल कांग्रेस के उन नेताओं (जहांगीर खान और शौकत मोल्ला) के कार्यालय भी जल गए, जो वर्तमान में पुलिस हिरासत में हैं और कई जांचों का सामना कर रहे हैं।

विपक्ष ने इसे लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बॉलीवुड फिल्मों के दृश्यों का हवाला देते हुए इसे साक्ष्य मिटाने की सुविधाजनक आग करार दिया है। वहीं, सीपीएम नेता बिकास रंजन भट्टाचार्य ने इसे रहस्यमयी बताते हुए विस्तृत जांच की मांग की है। अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अरिंदम नियोगी ने फॉरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया है और चुनाव आयोग को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जा रही है। यह घटना अब एक राजनीतिक ड्रामे में बदल गई है, जहां विपक्ष सत्ता पक्ष पर सबूत नष्ट करने का गंभीर आरोप लगा रहा है। दरअसल जिस तरीके से इस घटना को और खास तौर पर ईवीएम जलने की सूचना को दबाने का प्रयास किया गया, उससे संदेह और बढ़ गया है।