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सायनी पर कहा जब ऐसे धोखा दें, तो भरोसा किस पर करें

अंग्रेजी दैनिक को दिये साक्षातकार में विस्फोटक महुआ मोइत्रा

  • भय और लालच में फंस गये लोग

  • जिसपर भरोसा किया, वही धोखा दे गयी

  • अतिरिक्त सीटों के लिए भाजपा की साजिश है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए एक विस्तृत और बेबाक साक्षात्कार में तृणमूल कांग्रेस की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचे उथल-पुथल, पार्टी के भीतर हो रहे दलबदल और अपनी साथी सांसद सायनी घोष के विद्रोह पर गहरी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया है। मोइत्रा का यह साक्षात्कार ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा खेमा अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा उठाए हुए है।

साक्षात्कार के दौरान सबसे अधिक चर्चा का विषय बना पार्टी के भीतर का विभाजन। जब महुआ से यह पूछा गया कि राज्य में सत्ता के समीकरण बदलने के बाद पार्टी क्यों ताश के पत्तों की तरह ढह रही है, तो उन्होंने बहुत ही स्पष्ट लहजे में इसके पीछे के दो मुख्य कारणों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, पहला और सबसे कड़वा सच यह है कि राजनीति में लालच और विश्वासघात की कोई सीमा नहीं होती। जो लोग कल तक पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व की शपथ लेते थे, आज वे केवल व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पाला बदल रहे हैं।

मोइत्रा ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि अप्रैल में लोकसभा के भीतर परिसीमन कानून पर हुई बहस के दौरान भाजपा को मिली करारी हार और दो-तिहाई बहुमत हासिल न कर पाने की हताशा ही इस पूरे खेल के पीछे है। उनके अनुसार, भाजपा अब लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के रास्ते पर चलने के बजाय जोड़-तोड़ की राजनीति पर उतर आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत अपना गणित बिठा लिया है और वे किसी भी हाल में, साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लेकर अगले कुछ समय में 40 से 50 और सांसदों को अपने पाले में लाने की फिराक में हैं।

महुआ ने अफसोस जताते हुए कहा कि अब उनका लोकतंत्र, पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया या जनता के विश्वास पर कोई भरोसा नहीं रह गया है। वे संस्थाओं का उपयोग कर विपक्ष को कमजोर करने की नीति पर काम कर रहे हैं।

अपनी साथी सांसद सायनी घोष के संदर्भ में महुआ की भावुकता उनकी नाराजगी और दुख को साफ दर्शाती है। उन्होंने कहा, जब आप राजनीति में सालों तक साथ काम करते हैं, तो एक विश्वास विकसित होता है। लेकिन जब सायनी जैसे लोग, जिन्हें आप अपना करीबी मानती थीं, अचानक अपना पक्ष बदल लेते हैं, तो यह सोचना पड़ता है कि राजनीति में आखिर किस पर भरोसा किया जाए?

मोइत्रा का यह साक्षात्कार न केवल तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान संकट को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पार्टी के भीतर निष्ठा का संकट कितना गहरा हो चुका है। लेकिन महुआ का यह बयान गौर करने लायक है कि जितने भी लोग चुनाव जीतकर आये हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि उनकी जीत में ममता बनर्जी की भूमिका रही है। बिना ममता बनर्जी के चेहरे के कई ऐसे बागी नेता नगर निगम का चुनाव भी नहीं जीत पायेंगे।