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इनके ज्ञान का स्तर समझ में आता हैः अखिलेश यादव

योगी आदित्यनाथ से गलत बयान का मजाक उड़ा देश में

  • पुरुलिया में यह गलती हो गयी थी

  • बंगाल में भी उड़ाया गया इसका मजाक

  • इतिहास का  ज्ञान नहीं हैं ऐसे लोगों को

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक हालिया बयान पर तंज कसते हुए उनके सामान्य ज्ञान पर सवाल उठाए हैं। अखिलेश यादव ने कहा, अब इनके सामान्य ज्ञान का स्तर देख-सुनकर यह समझ में आ गया है कि ये लोग प्रतियोगी परीक्षाओं के विरोधी क्यों हैं? उन्होंने उत्तर प्रदेश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि ये वही लोग हैं जो बेरोजगारों की बेरोजगारी का मजाक उड़ाते हुए कहते थे कि प्रदेश में नौकरियों की कमी नहीं है, बल्कि युवाओं में योग्यता की कमी है। अखिलेश ने कटाक्ष किया कि जो लोग अपने पद की गरिमा और नाम के अनुरूप काम करने में खुद लड़खड़ाते हैं, वे दूसरों पर अयोग्यता का दोष मढ़ते हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया (जयपुर) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के ऐतिहासिक संदर्भों को आपस में मिला दिया।

योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में कहा, स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा! ऐतिहासिक रूप से यह नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस का है, न कि स्वामी विवेकानंद का। इस बड़ी चूक ने तुरंत राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

अखिलेश यादव ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी में इतना भी सामान्य ज्ञान नहीं है, तो वह राज्य कैसे चलाएगा? उन्होंने आगे कहा कि अगर उन्हें जानकारी है लेकिन ध्यान न होने की वजह से ऐसा हुआ, तो यह और भी बुरी बात है। अखिलेश के अनुसार, कम से कम बाहर (दूसरे राज्यों में) जाकर तो संयम और सटिकता दिखानी चाहिए। इससे पूरे विश्व में उत्तर प्रदेश की छवि को ठेस पहुंची है। दुनिया कह रही है कि यदि ऐसे लोगों के हाथ में यूपी की जिम्मेदारी है, तो उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है।

उन्होंने इसके पीछे का एक संभावित कारण बताते हुए कहा कि इनके दल के लोग स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल नहीं थे, इसलिए वे स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास के बारे में क्या ही जानेंगे। अखिलेश ने उन्हें ज्ञानी के बजाय बातें इधर-उधर करने वाला बताया। इस टिप्पणी के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी भाजपा को आड़े हाथों लिया और महापुरुषों के अपमान का आरोप लगाया।