स्टालिन ने विधेयक की प्रति जलायी
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राज्यव्यापी विरोध और काला झंडा प्रदर्शन
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सीएम आवास पर भी काला झंडा लगाया
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दक्षिण भारत की हिस्सेदारी कम होगी
राष्ट्रीय खबर
चेन्नईः तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के खिलाफ अपना विरोध बेहद कड़ा कर दिया है। गुरुवार को एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए उन्होंने केंद्र को अंतिम चेतावनी दी और विरोध स्वरूप प्रस्तावित परिसीमन विधेयक की प्रति जला दी।
नमक्कल में एक विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए स्टालिन ने न केवल विधेयक को आग के हवाले किया, बल्कि काला झंडा फहराकर कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया। उनके चेन्नई स्थित आवास पर भी काला झंडा लगाया गया। मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु की जनता से अपने घरों पर काले झंडे लगाने का आह्वान किया और इस कानून को काला कानून करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि यह कानून राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय ढांचे के लिए घातक साबित हो सकता है।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि परिसीमन का उपयोग उन राज्यों को दंडित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण उत्तर भारतीय राज्यों के पक्ष में होगा और दक्षिण भारतीय राज्यों, विशेषकर तमिलनाडु की आवाज को कमजोर करेगा। स्टालिन ने कहा, यह तमिलनाडु की अंतिम चेतावनी है। यदि राज्य के हितों को नुकसान पहुँचाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
यह विरोध प्रदर्शन 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले संसद के विशेष सत्र के दौरान हुआ है, जिसमें सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश कर रही है। वर्तमान में लोकसभा की सीटें 1971 की जनगणना पर आधारित हैं, जिन्हें बढ़ाकर 850 तक किए जाने का प्रस्ताव है। स्टालिन ने स्पष्ट किया कि उनके लिए विचारधारा और राज्य का हित चुनावी राजनीति से ऊपर है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो देश द्रमुक का वह मुखर और आक्रामक रूप देखेगा जिसके लिए यह आंदोलन जाना जाता है।