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सौर ऊर्जा संचालित माइक्रो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर का लाभ

मलावी के किसानों के लिए वरदान साबित हुआ सौर विज्ञान

एजेंसियां

लंदनः उप-सहारा अफ्रीका, विशेषकर मलावी जैसे देशों में कृषि उत्पादकता को बढ़ाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन अब एक अभिनव तकनीक इस परिदृश्य को बदलने के लिए तैयार है। इंग्लैंड की लफबरो यूनिवर्सिटी से निकले स्टार्टअप आफ्ट्रैक ने एक ऐसा माइक्रो इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर विकसित किया है जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर निर्भर है। यह तकनीक न केवल फसल की पैदावार बढ़ाने में सक्षम है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या का भी समाधान पेश करती है।

उप-सहारा अफ्रीका के अधिकांश खेतों में समस्या यह है कि हाथ से की जाने वाली पारंपरिक खेती के कारण मिट्टी की ऊपरी परत बेहद सख्त हो जाती है, जिसे तकनीकी भाषा में हार्डपैन कहा जाता है। आफ्ट्रैक का यह कमर तक की ऊँचाई वाला ट्रैक्टर एक विशेष स्टील के हार्डपैन ब्रेकर से लैस है। जब किसान इस ट्रैक्टर के पीछे चलते हुए इसे नियंत्रित करता है, तो यह मशीन मिट्टी की उस सख्त परत को गहराई तक चीर देती है।

गहरी दरारें बनने से वर्षा का जल सतह पर बहने के बजाय सीधे जमीन के भीतर समा जाता है। मिट्टी ढीली होने के कारण पौधों की जड़ें गहराई तक जा पाती हैं, जिससे वे अधिक पोषक तत्व सोख पाती हैं। यह तकनीक मिट्टी के कटाव को कम करती है और जल अवशोषण को अधिकतम करती है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, जहाँ सूखा एक आम समस्या बन चुका है, यह ट्रैक्टर मिट्टी को अधिक जुझारू बनाता है। परीक्षणों में देखा गया है कि इस विधि से खेती करने पर फसल की पैदावार में तीन गुना तक की वृद्धि हो सकती है, जो किसानों की आय को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

इस ट्रैक्टर की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बहुमुखी उपयोगिता है। जब यह खेत में जुताई नहीं कर रहा होता, तब यह एक मोबाइल पावर स्टेशन के रूप में कार्य करता है। ट्रैक्टर के साथ लगे सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली का उपयोग ग्रामीण परिवारों में रोशनी करने, मोबाइल चार्ज करने या अन्य छोटे उपकरणों को चलाने के लिए किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ अभी तक बिजली ग्रिड की पहुँच नहीं है।