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रूस का लुहान्स्क पर पूर्ण कब्जे का दावा

युद्ध के मैदान की जमीनी हकीकत से अलग है दावेदारी

एजेंसियां

कीवः यूक्रेन पर पूर्ण स्तर के आक्रमण के बाद से इस सप्ताह तीसरी बार रूस ने यह दावा किया है कि उसकी सेना ने पूर्वी यूक्रेन के लुहान्स्क क्षेत्र पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि उसके बलों ने लुहान्स्क पीपुल्स रिपब्लिक के संपूर्ण क्षेत्र की मुक्ति का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। हालांकि, सैन्य विश्लेषकों और युद्ध की निगरानी करने वाली संस्थाओं के अनुसार, रूस के इन दावों और सीमा रेखा की वास्तविक स्थिति में भारी अंतर दिखाई देता है।

लुहान्स्क उन चार क्षेत्रों में से एक है जिसे मॉस्को ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से अपने क्षेत्र में मिलाने का प्रयास किया है। युद्ध के पहले वर्ष से ही रूसी सेना ने लुहान्स्क के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था। सैन्य विशेषज्ञों के लिए यह समझ पाना कठिन है कि रूस को बार-बार एक ही क्षेत्र पर पूर्ण विजय की घोषणा करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि जब युद्ध के मोर्चों पर कोई बड़ी प्रगति नहीं हो रही होती, तब रूसी रक्षा मंत्रालय अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की प्रवृत्ति दिखाता है ताकि घरेलू स्तर पर और सैनिकों के मनोबल को बढ़ाया जा सके।

वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और अन्य युद्ध निगरानीकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के पहले तीन महीनों में रूसी सेना की आगे बढ़ने की गति में उल्लेखनीय गिरावट आई है। जहाँ 2025 की पहली तिमाही में रूसी सेना औसतन 11 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, वहीं इस वर्ष यह गति घटकर मात्र 5 किलोमीटर प्रति दिन रह गई है।

मोर्चे के कुछ हिस्सों में यूक्रेन ने न केवल रूसी हमलों को रोका है, बल्कि जवाबी कार्रवाई करते हुए कुछ क्षेत्रों को पुनः अपने नियंत्रण में भी लिया है। यूक्रेन ने रूस के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे एक भ्रामक प्रचार करार दिया है। यूक्रेनी सैन्य प्रवक्ता विक्टर ट्रेगुबोव ने तंज कसते हुए कहा, पिछले छह महीनों से फ्रंट लाइन की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। रूस का यह दावा किसी अप्रैल फूल प्रैंक (मजाक) जैसा जान पड़ता है। यूक्रेन का स्पष्ट कहना है कि लुहान्स्क के कुछ हिस्से अभी भी उनकी सेना के नियंत्रण में हैं और रूसी सेना वहां पूर्ण नियंत्रण पाने में विफल रही है।