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लोकसभा विस्तार की योजना पर कांग्रेस का पलटवार

इसे भटकाने की एक और साजिश बताया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस ने रविवार को लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री इस कदम को जबरन लागू कर रहे हैं, जो केवल बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों के पक्ष में काम करेगा। कांग्रेस ने इस पूरी कवायद को जनता का ध्यान भटकाने वाला हथियार करार दिया है।

विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश की जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और ऐसे भ्रामक बयान दे रहे हैं जिनका मकसद केवल धोखा देना है। कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, प्रधानमंत्री अपनी पुरानी चालों पर उतरे हुए हैं। वे कह रहे हैं कि यदि लोकसभा की क्षमता 50 प्रतिशत बढ़ा दी जाए और प्रत्येक राज्य की सीटों में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। यह देश के लोगों को गुमराह करना है, जिसमें प्रधानमंत्री को महारत हासिल है।

जयराम रमेश ने उदाहरण देते हुए समझाया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश और केरल की लोकसभा सीटों के बीच 60 का अंतर है। मोदी के प्रस्ताव के बाद यह अंतर बढ़कर 90 हो जाएगा। इसी तरह, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बीच का अंतर 41 से बढ़कर कम से कम 61 हो जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रस्ताव बड़े और अधिक आबादी वाले राज्यों को और अधिक शक्तिशाली बना देगा, जबकि पंजाब, हरियाणा और पूर्वोत्तर जैसे राज्यों का सापेक्ष प्रभाव कम हो जाएगा।

यह विवाद उस समय बढ़ा है जब प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि संसद के बजट सत्र को तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को 2029 से लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान करना है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संकेत दिया था कि अप्रैल में सदन की बैठक फिर से होगी।

खबरों के अनुसार, 16 अप्रैल को संसद का सत्र दोबारा शुरू होगा ताकि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने वाले विधेयकों को पारित किया जा सके। प्रधानमंत्री ने केरल में एक चुनावी रैली के दौरान आश्वासन दिया कि इस विस्तार से किसी भी दक्षिणी राज्य की सीटों में कटौती नहीं होगी, बल्कि यह महिला आरक्षण को समय पर लागू करने के लिए अनिवार्य है। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि गंभीर आर्थिक और विदेश नीति संकटों के बीच बिना व्यापक सार्वजनिक चर्चा के इस तरह का बदलाव करना केवल असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।