मध्य कोर्डोफन में पांच बच्चों समेत 14 की मौत
कोर्डोफोनः सूडान में जारी गृहयुद्ध ने एक बार फिर मानवीय क्रूरता की सीमाओं को लांघ दिया है। मध्य कोर्डोफन क्षेत्र में सूडानी अर्धसैनिक बलों और उनके सहयोगी विद्रोहियों द्वारा किए गए एक ताजा हमले में कम से कम 14 निर्दोष लोगों की जान चली गई है। सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क नामक चिकित्सा समूह द्वारा रविवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार, मृतकों में पांच मासूम बच्चे और दो महिलाएं भी शामिल हैं। यह हमला उस समय हुआ जब रैपिड सपोर्ट फोर्सेज और उनके सहयोगी सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ ने दक्षिण कोर्डोफन प्रांत की राजधानी डिलिंग पर शनिवार को एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया।
डिलिंग शहर पिछले दो वर्षों से आरएसएफ की घेराबंदी और भीषण बमबारी का सामना कर रहा है, जिसके कारण वहां अकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। हाल ही में सूडानी सेना ने इस घेराबंदी को तोड़ने में सफलता हासिल की थी, लेकिन शनिवार को हुए इस प्रतिशोधात्मक हमले ने एक बार फिर शहर को दहला दिया। सेना का दावा है कि उन्होंने इस हमले को सफलतापूर्वक विफल कर दिया है, लेकिन चिकित्सा समूहों का कहना है कि घंटों तक चली गोलाबारी ने रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया। इस हमले में 23 अन्य लोग घायल हुए हैं, जिनमें सात बच्चे शामिल हैं। मानवीय सहायता की कमी और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
चिकित्सा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि डिलिंग में भी दारफुर के एल-फाशर जैसे विनाशकारी परिदृश्य उत्पन्न हो सकते हैं। पिछले साल अक्टूबर में एल-फाशर में हुए आरएसएफ के हमले को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने नरसंहार के लक्षणों वाला बताया था, जहां महज तीन दिनों के भीतर 6,000 से अधिक लोग मारे गए थे। सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और आरएसएफ के बीच छिड़ा यह सत्ता संघर्ष अब एक पूर्ण गृहयुद्ध का रूप ले चुका है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 40,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक होने की आशंका है।
वर्तमान में युद्ध का केंद्र दारफुर और कोर्डोफन क्षेत्र बन गए हैं, जहां रोजाना ड्रोन हमलों की खबरें आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, इस साल मार्च के मध्य तक केवल ड्रोन हमलों में ही 500 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं। सामूहिक हत्याकांड, यौन हिंसा और अन्य जघन्य अपराधों की अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा युद्ध अपराधों और मानवता के विरुद्ध अपराधों के रूप में जांच की जा रही है। यह संघर्ष न केवल सूडान बल्कि पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।