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नरसंहार के आरोपों के बीच फिर से नये सामूहिक कब्र का खुलासा

शिकायत पर दफनाये गये 25 से अधिक बच्चों के शव बरामद

नैरोबीः पश्चिमी केन्या के केरिचो क्षेत्र में एक चर्च के स्वामित्व वाले कब्रिस्तान से कम से कम 33 शवों की बरामदगी ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। गुरुवार को हुई इस दर्दनाक बरामदगी में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन मृतकों में 25 से अधिक बच्चे शामिल हैं। खोजी दल और जासूसों ने जब इस सामूहिक कब्र की खुदाई की, तो उन्हें न केवल पूर्ण शव मिले, बल्कि कई क्षत-विक्षत मानव अंग भी मिले, जिन्हें बोरियों में भरकर बड़ी ही बेरहमी और गोपनीयता के साथ दफनाया गया था। इस घटना ने केन्याई प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, बरामद किए गए अवशेषों में 25 बच्चे और आठ वयस्क शामिल हैं। जांच दल का नेतृत्व कर रहे आपराधिक जांच निदेशालय के प्रमुख मोहम्मद अमीन ने संवाददाताओं को बताया कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इन शवों को नियामिरा जिला अस्पताल के मुर्दाघर से स्थानांतरित किया गया था। यह तथ्य सामने आने के बाद अब जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या इन शवों का निपटान कानूनी प्रक्रियाओं के तहत किया गया था या यह किसी बड़े अपराध या लापरवाही को छिपाने की कोशिश थी। बोरियों में बंद कटे-फटे अंगों की मौजूदगी इस मामले को और अधिक संदिग्ध और भयावह बनाती है।

केन्याई कानून के अनुसार, लावारिस शवों या अस्पताल के मुर्दाघर से निकाले गए अवशेषों के निपटान के लिए एक सख्त प्रोटोकॉल और सार्वजनिक सूचना की आवश्यकता होती है। हालांकि, एक निजी कब्रिस्तान में इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के शवों को एक साथ दफनाना किसी सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं लगता। स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। वे यह जानना चाहते हैं कि ये बच्चे कौन थे, उनकी मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और अस्पताल प्रशासन ने उन्हें सम्मानजनक अंतिम संस्कार के बजाय इस तरह सामूहिक कब्र में क्यों झोंक दिया।

वर्तमान में जासूस इस बात की कड़ियाँ जोड़ रहे हैं कि क्या यह मामला केवल अस्पताल की प्रशासनिक विफलता है या इसके पीछे कोई संगठित अपराध छिपा है। फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि शवों की पहचान की जा सके और मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। यह घटना केन्या की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और मुर्दाघरों के प्रबंधन में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन की ओर भी इशारा करती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, केन्याई जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, जो इस अमानवीय कृत्य के पीछे जिम्मेदार लोगों के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।