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अमेरिका के जमीनी हमले पर ईरान की जोरदार चेतावनी

अपने सैनिकों को आग में झोंकने का अंजाम बुरा होगा

तेहरानः ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने रविवार को अमेरिका को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अमेरिका ने जमीनी हमले की हिमाकत की, तो ईरानी सेना अमेरिकी सैनिकों को आग के हवाले कर देगी। सरकारी मीडिया के अनुसार, कलिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरानी बल अमेरिकी सैनिकों के आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए कड़ा सबक सिखाया जा सके। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइलें तैनात हैं और देश का संकल्प तथा विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत है।

इस जुबानी जंग के बीच, कलिबाफ ने उस 15-सूत्रीय शांति योजना को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसे पिछले सप्ताह पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को सौंपा गया था। उन्होंने इसे ट्रम्प प्रशासन की इच्छाओं की सूची करार देते हुए कहा कि अमेरिका वह सब हासिल करना चाहता है जिसमें वह सैन्य बल के माध्यम से विफल रहा है। कलिबाफ ने दो टूक कहा, जब तक अमेरिका ईरान के आत्मसमर्पण की मांग करेगा, हमारा उत्तर स्पष्ट है: अपमान स्वीकार करना हमसे कोसों दूर है। यह बयान दर्शाता है कि कूटनीतिक रास्तों के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई बहुत गहरी हो चुकी है।

तनाव की आंच अब शैक्षणिक संस्थानों तक भी पहुंच गई है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजरायली शैक्षणिक केंद्रों को वैध लक्ष्य बनाने की धमकी दी है। यह धमकी उन हालिया हमलों के जवाब में दी गई है, जिनमें ईरानी विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों को निशाना बनाया गया था।

इजरायल ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया था कि ये संस्थान हथियार विकास से जुड़े हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने सोमवार, 30 मार्च की दोपहर 12 बजे तक की समयसीमा तय करते हुए मांग की है कि अमेरिका आधिकारिक बयान जारी कर ईरानी विश्वविद्यालयों पर हुए हमलों की निंदा करे, अन्यथा उसे परिणाम भुगतने होंगे।

सुरक्षा चिंताओं के कारण, मध्य पूर्व में स्थित अमेरिकी विश्वविद्यालयों, जैसे जॉर्जटाउन, एनवाईयू और नॉर्थवेस्टर्न, के परिसरों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ बेरुत ने एहतियात के तौर पर अगले दो दिनों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की घोषणा की है।

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष फडलो खुरी ने कहा कि यद्यपि प्रत्यक्ष खतरे का कोई ठोस सबूत नहीं है, फिर भी छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि धमकियां या हिंसा उन्हें उनके मिशन से डिगा नहीं सकतीं। वर्तमान हालात को देखते हुए पूरा क्षेत्र एक भीषण सैन्य संघर्ष की कगार पर खड़ा नजर आ रहा है।