वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम 116 डॉलर के पार
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खर्ग द्वीप पर कब्जा की बात कही
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तेल आधारित कारोबार में अस्थिरता
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साढ़े तीन हजार सैनिक भी करीब पहुंचे
वाशिंगटनः डोनाल्ड ट्रंप के हालिया विवादास्पद बयान कि वे ईरान का तेल लेना चाहते हैं, ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में आग लगा दी है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत तेजी से बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। सोमवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में 2 फीसद का उछाल देखा गया, जिसने एशियाई शेयर बाजारों को हिलाकर रख दिया।
ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से कहा कि उनका पसंदीदा विकल्प ईरान के मुख्य निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर कब्जा करना हो सकता है। उन्होंने अपने विरोधियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अमेरिका में कुछ लोग इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं।
इस बयान ने खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस आपूर्ति पर निर्भर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में डर पैदा कर दिया है। जापान का निक्केई सूचकांक 3 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.4 प्रतिशत तक गिर गया। यूरोप में भी प्राकृतिक गैस की कीमतों में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
मध्य पूर्व में तनाव उस समय और बढ़ गया जब अतिरिक्त 3,500 अमेरिकी सैनिक क्षेत्र में पहुंचे। इसके साथ ही, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायली ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर इस युद्ध में प्रवेश कर लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि युद्ध का यह विस्तार वैश्विक ऊर्जा संकट को और भी गंभीर बना सकता है। मार्च की शुरुआत से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 59 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है, जिसने 1990 में कुवैत पर सद्दाम हुसैन के आक्रमण के समय बने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
इस संकट को देखते हुए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार दोपहर शेल, बीपी और इक्विनोर जैसी बड़ी ऊर्जा कंपनियों के प्रमुखों के साथ आपातकालीन बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से निपटने के लिए आवश्यक आपातकालीन उपायों और शिपिंग उद्योग पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। निवेशक अब इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि यदि तनाव और बढ़ा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गहरे मंदी के चक्र में फंस सकती है।