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पड़ोसियों ने कहा, जमीनी हमला से माहौल बिगड़ेगा

पाकिस्तान में युद्धविराम पर बैठक की जोरदार तैयारी

इस्लामाबादः मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों के बीच पाकिस्तान में क्षेत्रीय शक्तियों का एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस कूटनीतिक हलचल का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी हिंसा को रोकना और एक व्यापक युद्ध की स्थिति को टालना है। हालांकि, कूटनीति की इन कोशिशों के समानांतर युद्ध के मैदान में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है।

हाल ही में ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलिबाफ ने अमेरिका को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरानी सेना जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिकों के आगमन का इंतजार कर रही है ताकि उन्हें आग के हवाले किया जा सके और उनके क्षेत्रीय सहयोगियों को हमेशा के लिए दंडित किया जा सके।

ईरानी नेतृत्व का यह कड़ा रुख तब सामने आया है जब लगभग 2,500 अमेरिकी मरीन कमांडो की एक टुकड़ी इस अशांत क्षेत्र में पहुँची है। कलिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान की मिसाइलें अपने लक्ष्यों पर तैनात हैं और उनकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ उनका संकल्प और विश्वास अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है। इस तनाव ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब ईरान समर्थित हूत विद्रोही भी इस महीने भर से चल रहे युद्ध में आधिकारिक रूप से शामिल हो गए।

इस संघर्ष के आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी साबित हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की भारी किल्लत देखी जा रही है और हवाई यात्रा मार्गों में बदलाव के कारण वैश्विक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के कड़े नियंत्रण ने शेयर बाजारों और कमोडिटी की कीमतों में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है।

हूतियों की इस युद्ध में सक्रियता ने लाल सागर के बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। ज्ञात हो कि दुनिया का लगभग 12 फीसद व्यापार इसी मार्ग से होता है। यदि हूती विद्रोही फिर से मालवाहक जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो वैश्विक शिपिंग उद्योग और रसद आपूर्ति ठप हो सकती है, जिससे पूरी दुनिया में महंगाई का एक नया दौर शुरू होने की आशंका है। पाकिस्तान में हो रही यह बैठक इन जटिल चुनौतियों का समाधान खोजने की एक महत्वपूर्ण लेकिन कठिन कोशिश है।