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मीठे पानी की मछलियों की आबादी में कमी

पानी के नीचे होने की वजह से तुरंत जानकारी नहीं मिली

  • शोध में 81 प्रतिशत की कमी पायी गयी

  • मछलियों का प्रवासन भी अब संकट में है

  • दुनिया भर की नदियों का एक जैसा हाल

राष्ट्रीय खबर

रांचीः पृथ्वी पर जानवरों के सबसे लंबे और सबसे महत्वपूर्ण प्रवास (माइग्रेशन) नदियों की सतह के नीचे होते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरण संधि, कन्वेंशन ऑन द कंजर्वेशन ऑफ माइग्रेटरी स्पीशीज ऑफ वाइल्ड एनिमल्स की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि इनमें से कई प्रवास अब तेजी से खत्म हो रहे हैं।

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ब्राजील में आयोजित सीएमएस के 15वें सम्मेलन में जारी ग्लोबल असेसमेंट ऑफ माइग्रेटरी फ्रेशवॉटर फिशेज के अनुसार, मीठे पानी की प्रवासी मछलियां दुनिया भर में सबसे अधिक खतरे वाली प्रजातियों में से एक हैं। ये मछलियां स्वस्थ नदियों को बनाए रखने, अंतर्देशीय मत्स्य पालन को समर्थन देने और करोड़ों लोगों को भोजन और आजीविका प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

संकट के मुख्य कारण मूल्यांकन के अनुसार, बांधों का निर्माण, आवास विखंडन, प्रदूषण, अत्यधिक मछली पकड़ने और जलवायु परिवर्तन के कारण नदियों का संपर्क टूट रहा है। रिपोर्ट में 325 ऐसी प्रजातियों की पहचान की गई है जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। इसमें दक्षिण अमेरिका की अमेज़न, यूरोप की डेन्यूब, एशिया की मेकांग और भारतीय उपमहाद्वीप की गंगा-ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख नदी प्रणालियों को प्राथमिकता दी गई है।

रिपोर्ट बताती है कि 1970 के बाद से मीठे पानी की प्रवासी मछलियों की आबादी में वैश्विक स्तर पर लगभग 81 फीसद की गिरावट आई है। सीएमएस सूची में शामिल 97 फीसद प्रजातियां अब विलुप्ति के कगार पर हैं।

अमेज़न बेसिन का उदाहरण अमेज़न बेसिन प्रवासी मछलियों के अंतिम गढ़ों में से एक है, लेकिन वहां भी विकास का दबाव बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, डोराडो कैटफ़िश किसी भी मछली द्वारा किए जाने वाले सबसे लंबे प्रवास का रिकॉर्ड रखती है, जो एंडीज की पहाड़ियों से तटीय क्षेत्रों तक 11,000 किलोमीटर की यात्रा करती है। अब ब्राजील और अन्य देश इन प्रजातियों को बचाने के लिए 2026-2036 की कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय मुख्य लेखक डॉ. जेब होगन के अनुसार, दुनिया के महानतम वन्यजीव प्रवास पानी के नीचे होते हैं और इन्हें बचाने के लिए देशों को नदियों को एक जुड़े हुए तंत्र के रूप में प्रबंधित करना होगा। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ की मिशेल थिएम ने जोर दिया कि नदियाँ सीमाओं को नहीं पहचानतीं, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही इस जैव विविधता संकट को हल करने का एकमात्र रास्ता है।

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