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भारत में गिरफ्तार किये गये अमेरिकी नागरिक पर खुलासा

वह ड्रोन विशेषज्ञ संस ऑफ लिबर्टी का सदस्य है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की एक बड़ी जांच के केंद्र में इस समय एक अमेरिकी नागरिक, मैथ्यू आरोन वैनडाइक, का नाम सबसे ऊपर है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया है। उन पर म्यांमार के विद्रोही समूहों को ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने, अवैध रूप से सीमा पार करने और भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय सशस्त्र समूहों के साथ संबंध रखने के गंभीर आरोप हैं।

46 वर्षीय मैथ्यू वैनडाइक खुद को एक सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और वृत्तचित्र फिल्म निर्माता बताते हैं। वैनडाइक पहली बार 2011 के लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आए थे। वहां वे गद्दाफी शासन के खिलाफ लड़ रहे विद्रोहियों के साथ शामिल हो गए थे। इस दौरान उन्हें बंदी बना लिया गया और उन्होंने करीब छह महीने अबू सलीम जेल में बिताए, जहाँ से वे बाद में भाग निकले।

लिबिया के बाद, वैनडाइक ने संस ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल  नामक संगठन की स्थापना की। यह संगठन खुद को दुनिया की पहली गैर-लाभकारी सैन्य अनुबंध कंपनी कहता है। इसका मुख्य कार्य संघर्ष क्षेत्रों में स्थानीय सशस्त्र समूहों को सैन्य प्रशिक्षण, रणनीतिक सलाह और संसाधन प्रदान करना है।

वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से हिरासत में लिया गया, जबकि उनके साथियों को लखनऊ और दिल्ली से पकड़ा गया। एनआईए के अनुसार, यह समूह पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन इनका असली मकसद मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार जाना था। आरोप है कि वैनडाइक और उनके साथी म्यांमार के एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को उन्नत ड्रोन तकनीक और असेंबली का प्रशिक्षण दे रहे थे।

जांच में यूरोप से भारत के रास्ते म्यांमार में ड्रोन की बड़ी खेप भेजने के प्रमाण मिले हैं। एनआईए का मानना है कि जिन समूहों को ये विदेशी प्रशिक्षण दे रहे थे, उनके तार भारत में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े हैं। यह सीधे तौर पर भारत की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को 27 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है। सुरक्षा एजेंसियां अब इनके डिजिटल फुटप्रिंट्स और मोबाइल डेटा के जरिए इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और फंडिंग के स्रोतों का पता लगा रही हैं।