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ईडी ने अब नब्बे बैंक खाते फ्रीज कर दिये

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में 597 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच जारी

  • सरकारी धन की हेराफेरी का जाल

  • विभागों का पैसा फिक्स्ड किया था

  • फर्जी कंपनियों के जरिए लेन देन

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 597 करोड़ रुपये के गबन के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है। शुक्रवार को जांच एजेंसी ने इस घोटाले से संबंधित 90 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। यह कार्रवाई चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और बेंगलुरु में 19 विभिन्न परिसरों पर की गई छापेमारी के बाद हुई है, जिसमें भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेजी सबूत जब्त किए गए हैं।

ईडी की जांच में यह सामने आया है कि इस घोटाले का मुख्य लक्ष्य सरकारी विभागों का वह पैसा था, जिसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सावधि जमा के रूप में रखा जाना था। इसमें मुख्य रूप से हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ नगर निगम और अन्य सरकारी संस्थाओं का पैसा शामिल था। इन निधियों को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के अवैध रूप से डायवर्ट कर दिया गया। इस साजिश में बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। रिभव ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दिया था, लेकिन उन्होंने कई शेल (फर्जी) कंपनियों के माध्यम से धन की हेराफेरी जारी रखी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, चोरी किए गए सरकारी धन को शेल संस्थाओं के एक जटिल जाल के माध्यम से घुमाया गया। सबसे पहले, यह पैसा स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में भेजा गया, जिसका संचालन स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला कर रहे थे। इसके बाद, इस राशि को जौहरियों के खातों में स्थानांतरित किया गया ताकि फर्जी बिलिंग के जरिए सोने की खरीद का नाटक किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में होटल व्यवसायी और रियल एस्टेट डेवलपर विक्रम वाधवा का नाम भी सामने आया है, जिन्होंने प्रिज्मा रेजिडेंसी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी जैसी संस्थाओं को धन हस्तांतरित किया।

ईडी ने इस मामले की जांच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत शुरू की है। यह कार्रवाई फरवरी 2026 में पंचकूला के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई। दरअसल, विकास एवं पंचायत विभाग के खातों में शेष राशि के मिलान न होने पर इस धोखाधड़ी का पहली बार पता चला था। फिलहाल, आरोपी विक्रम वाधवा फरार बताया जा रहा है और ईडी उनकी तलाश में जुटी है।