Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Virat Kohli Century: "एक दिन सब खत्म हो जाएगा..." केकेआर को हराने के बाद क्यों भावुक हुए विराट? Peddi Movie Update: राम चरण की 'पेड्डी' का बड़ा धमाका, KGF मेकर्स संभालेंगे ओवरसीज डिस्ट्रीब्यूशन North Korea Retirement Age: नॉर्थ कोरिया ने बढ़ाई रिटायरमेंट की उम्र, बुजुर्ग होती आबादी के बीच किम ... IPL 2026 Ticket Fraud: आईपीएल टिकट के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 600 फर्जी साइट्स एक्टिव Google Gemini Intelligence: स्मार्टफोन चलाने का तरीका बदल देगा गूगल का नया AI सिस्टम, जानें फीचर्स गुरु बृहस्पति को मजबूत करने के तरीके: शादी में देरी और धन की कमी दूर करेंगे ये 5 ज्योतिषीय उपाय Gym Mistake: वीकेंड पार्टी के बाद मंडे वर्कआउट बन सकता है जानलेवा, हार्ट अटैक का बढ़ता है खतरा India-Pakistan Relations: पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने किया RSS नेता होसबोले का समर्थन, 'बातचीत ज... BJP vs Congress: राहुल गांधी की विदेश यात्राओं को लेकर संबित पात्रा का बड़ा खुलासा, FCRA और IT एक्ट क... Maharashtra ATS Raid: शहजाद भट्टी गैंग के नेटवर्क पर एटीएस का बड़ा प्रहार, 50 ठिकानों पर छापेमारी

आर्थिक स्थिरता कोष के लिए 57,381 करोड़

राहुल गांधी की पूर्व चेतावनी का केंद्र पर असर हुआ

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही

  • तेल के दाम से अफरा तफरी मची

  • बाहरी झटकों से बचाने की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच, भारत सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में घोषणा की कि केंद्र सरकार ने आर्थिक स्थिरता कोष के लिए 57,381 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह कदम विशेष रूप से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचे कच्चे तेल के झटके, ऊर्जा की कमी की आशंकाओं और आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न बाधाओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक प्रभाव वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तीव्र हो गया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल पर बमबारी और क्षेत्र में अतिरिक्त मरीन बलों की तैनाती ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। द हिंदू के संपादक सुरेश नंबथ के अनुसार, सरकार का यह अतिरिक्त आवंटन युद्ध की गंभीरता को देखते हुए एक रणनीतिक निर्णय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चित काल में मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए भारत को वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की तलाश तेज करनी होगी।

कोविड-19 से मिली सीख और राजकोषीय रोडमैप अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री ने वर्तमान स्थिति की तुलना महामारी के दौरान सरकार द्वारा अपनाई गई आर्थिक नीतियों से की। उन्होंने रेखांकित किया कि कोविड-19 के बाद की गई नीतिगत पहलों ने न केवल अर्थव्यवस्था को तेजी से उभरने में मदद की, बल्कि व्यापक आर्थिक ढांचे को भी मजबूत किया। इसी मजबूती के कारण भारत आज राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग से विचलित हुए बिना वैश्विक झटकों को सहन करने में सक्षम है।

कोष का उद्देश्य और भविष्य की रणनीति यह प्रस्तावित आर्थिक स्थिरता कोष सरकार को वह वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा जिससे वह अचानक आने वाली बाधाओं, जैसे उप-क्षेत्रों में अप्रत्याशित झटके या किसी भी ऐसी घटना का जवाब दे सके जिसका व्यापक राजकोषीय प्रभाव हो। संक्षेप में, यह फंड वैश्विक हेडविंड्स (विपरीत परिस्थितियों) के खिलाफ एक बफर के रूप में कार्य करेगा, जिससे घरेलू विकास की गति को सुरक्षित रखा जा सके।