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आर्थिक स्थिरता कोष के लिए 57,381 करोड़

राहुल गांधी की पूर्व चेतावनी का केंद्र पर असर हुआ

  • वैश्विक आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही

  • तेल के दाम से अफरा तफरी मची

  • बाहरी झटकों से बचाने की तैयारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच, भारत सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में घोषणा की कि केंद्र सरकार ने आर्थिक स्थिरता कोष के लिए 57,381 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह कदम विशेष रूप से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचे कच्चे तेल के झटके, ऊर्जा की कमी की आशंकाओं और आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न बाधाओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक प्रभाव वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष तीव्र हो गया है। हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान के मुख्य तेल निर्यात टर्मिनल पर बमबारी और क्षेत्र में अतिरिक्त मरीन बलों की तैनाती ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। द हिंदू के संपादक सुरेश नंबथ के अनुसार, सरकार का यह अतिरिक्त आवंटन युद्ध की गंभीरता को देखते हुए एक रणनीतिक निर्णय है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चित काल में मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने के लिए भारत को वैकल्पिक ईंधन स्रोतों की तलाश तेज करनी होगी।

कोविड-19 से मिली सीख और राजकोषीय रोडमैप अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री ने वर्तमान स्थिति की तुलना महामारी के दौरान सरकार द्वारा अपनाई गई आर्थिक नीतियों से की। उन्होंने रेखांकित किया कि कोविड-19 के बाद की गई नीतिगत पहलों ने न केवल अर्थव्यवस्था को तेजी से उभरने में मदद की, बल्कि व्यापक आर्थिक ढांचे को भी मजबूत किया। इसी मजबूती के कारण भारत आज राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग से विचलित हुए बिना वैश्विक झटकों को सहन करने में सक्षम है।

कोष का उद्देश्य और भविष्य की रणनीति यह प्रस्तावित आर्थिक स्थिरता कोष सरकार को वह वित्तीय लचीलापन प्रदान करेगा जिससे वह अचानक आने वाली बाधाओं, जैसे उप-क्षेत्रों में अप्रत्याशित झटके या किसी भी ऐसी घटना का जवाब दे सके जिसका व्यापक राजकोषीय प्रभाव हो। संक्षेप में, यह फंड वैश्विक हेडविंड्स (विपरीत परिस्थितियों) के खिलाफ एक बफर के रूप में कार्य करेगा, जिससे घरेलू विकास की गति को सुरक्षित रखा जा सके।