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Sagar News: बीमारियों पर रिसर्च के लिए सागर यूनिवर्सिटी और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में समझौता, आधुनिक लैब्स में होगा इलाज का आविष्कार

सागर: डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय और ब़ुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज आपस में बड़ा करार करने जा रहे हैं. दोनों संस्थान इस करार के तहत रिसर्च और स्टडी में एक दूसरे का सहयोग करेंगे और पूरक बनेंगे. सागर यूनिवर्सिटी के ऐसी डिपार्टमेंट जिनकी रिसर्च मेडिकल साइंस में मददगार हो सकती है, उन सभी डिपार्टमेंट और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के बीच होने वाले इस कार से दोनों संस्थान को फायदा होगा.

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के लिए सागर यूनिवर्सिटी के अत्याधुनिक उपकरण रिसर्च में मददगार साबित होंगे. साथ ही यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों को रिसर्च में मदद मिलेगी. वहीं, सागर यूनिवर्सिटी को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बीमारियों से जुड़े सैंपल रिसर्च के लिए मिलेंगे. इस कारार से दोनों संस्थान को रिसर्च और स्टडी के क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी. आगामी 16 मार्च को दोनों संस्थाओं के बीच करार होने जा रहा है.

एक दूसरे के पूरक बनेंगे दोनों संस्थान
दोनों संस्थाओं के बीच होने जा रहे करार एक दूसरे के लिए काफी मददगार साबित होने जा रहे हैं. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज मेडिकल साइंस से जुड़े दूसरे विषयों के विशेषज्ञों की कमी से जूझता है तो वहीं राज्य स्तरीय संस्थान होने के कारण आधुनिक उपकरणों की कमी का सामना करना पड़ता है. ऐसे में विभिन्न बीमारियों की जांचों और विशेषज्ञों की सलाह के लिए कई बार उन्हें सैंपल दूसरे शहरों में बड़े-बड़े संस्थानों में भेजना होता है, जिनकी रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता है.

वहीं, मेडिकल कॉलेज में बीमारियों से जुड़े कई सैंपल आते हैं, लेकिन सागर यूनिवर्सिटी में इस तरह के सैंपल की कमी होती है. खासकर बीमारियों से जुड़ी जांच और रिसर्च के लिए सागर यूनिवर्सिटी के लिए अस्पतालों और दूसरे संस्थानों से सैंपल जुटाना होते हैं. वहीं, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) की स्थापना की गयी है. इसके साथ ही इन्स्ट्रूमेशन सेंटर और रिसर्च सेंटर की स्थापना की गयी है. लेकिन विशेषज्ञों और अत्याधुनिक उपकरणों की कमी कई बार शोध और अनुसंधान में व्यावधान का कारण बनती है, ऐसे में दोनों संस्थान एक दूसरे के पूरक बनेंगे.

क्या है मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU)
भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मूलभूत और clinical research को बढ़ावा देने, गैर-संचारी रोगों (NCDs) पर रिसर्च और स्वास्थ्य अनुसंधान को मजबूत करने मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) की स्थापना बुंदेलखंड मेडिकल कालेज में की गयी है. जिसमें कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग पर आणविक जीव विज्ञान, कोशिका संवर्धन और अन्य आधुनिक नैदानिक उपकरणों के माध्यम से अनुसंधान करना.

क्या कहना है विशेषज्ञों का
सागर यूनिवर्सिटी के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग के हैड डॉ. सी पी उपाध्याय बताते हैं कि, ”बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज हमारे सागर का पुराना और प्रचलित मेडिकल काॅलेज है. जहां मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (MRU) स्थापित की गयी है, जो मेडिकल काॅलेज ने बहुत मेहनत करके फंड लेकर आए. उन लोगों ने इंस्ट्रूमेंटेशन सेंटर के साथ एक रिसर्च सेंटर भी विकसित किया है. लेकिन उनके वहां एक कमी समझ आयी है कि जो एक्सपर्ट सपोर्ट होती है, वो कम होने के कारण उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है.

तो सागर यूनिवर्सिटी के बाॅयोटेक्नालाॅजी, फार्मेसी, माइक्रोबायोलॉजी, जूलॉजी सब मिलकर बुंदेलखंड मेडिकल काॅलेज के साथ एमओयू कर रहे हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि मेडिकल काॅलेज को एक्सपर्ट एनालिटकल सपोर्ट मिलेगा. साथ ही एक्सपर्ट टेक्नीक जानने को मिलेगी. क्योंकि हमारे यहां पर जो रिसर्च इंस्ट्रूमेंट्स है, वह बहुत ही ज्यादा एडवांस है. हमें ये फायदा होगा कि उनके पास सैंपल बहुत मिलते हैं.

खासकर जो वायरल, कैंसर और दूसरी बीमारियां हैं, उनके कई तरह के सैंपल उनके पास होते हैं. हम दोनों के एक दूसरे से जुड़ने से यूनिवर्सिटी को सैंपल कलेक्शन पर काम करने को मिलेगा. हम रिसर्च प्रोजेक्ट भी साथ-साथ ले सकते हैं. इसके अलावा जो एथिकल कमेटी होती है, उसके लिए उन्हें एक्सपर्ट चाहिए होता है, कि उसके साथ तुरंत काम को आगे बढ़ाया जाए, सिर्फ सैंपल ना किया जाए. इस करार से दोनों संस्थानों का काफी फायदा होगा.