इम्फाल हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल के पास विस्फोट
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मणिपुर में प्रीपैक (प्रो) की महिला सदस्य गिरफ्तार
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सीमावर्ती इलाकों में लगातार अभियान अब भी जारी
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शांति बहाली की मांग को लेकर रैली में शामिल हुए लाखों
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: मणिपुर में जातीय संघर्ष की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर राज्य में तनावपूर्ण शांति और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कई महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आईं। 3 मई को इम्फाल अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल क्षेत्र के पास एक विस्फोट की सूचना मिली, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। हालांकि, सुरक्षा बलों और पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी और तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
इसी दिन चुराचांदपुर जिले के मौलसांग गांव के पास भारतीय सेना के जवानों ने गश्त के दौरान एक पुराना संदिग्ध विस्फोटक उपकरण बरामद किया। रेड शील्ड डिवीजन के इंजीनियरों और बम निरोधक दस्ते ने एक प्रशिक्षित कुत्ते की मदद से खतरे की पुष्टि की और विस्फोटक को नियंत्रित तरीके से नष्ट कर दिया। सेना की इस सतर्कता से एक बड़ा हादसा टल गया।
राजनीतिक और सामाजिक मोर्चे पर, संयुक्त सुरक्षा समिति (यूपीसी) के नेतृत्व में नंबोल में एक विशाल सार्वजनिक रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में पांच निर्वाचन क्षेत्रों के लगभग 222 संगठनों और लाखों की संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को लागू करने, विस्थापितों के पुनर्वास और उग्रवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। रैली के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि राज्य में शांति बहाली के प्रयासों को मजबूती देने के लिए है। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों से एकजुट होकर संकट के समाधान के लिए सामूहिक आंदोलन का आह्वान किया।
सुरक्षा बलों को एक और सफलता काकचिंग जिले में मिली, जहां प्रतिबंधित संगठन प्रीपैक (प्रो) की एक सक्रिय महिला सदस्य, लोंगजाम जेनेवी को गिरफ्तार किया गया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई को उग्रवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कुल मिलाकर, संघर्ष की बरसी पर मणिपुर में एक ओर जहां जनता न्याय और शांति की गुहार लगा रही है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां हिंसा रोकने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।