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डिजिटल लर्निंग की दौड़ में पिछड़ गयी राजधानी रांची

छोटे जिलों में इसमें बाजी मार ली है

  • गिरिडीह का पचंबा सबसे बेहतर

  • रांची का कोई स्कूल नहीं आया

  • देवघर और जामताड़ा भी अच्छे रहे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः झारखंड के सरकारी स्कूलों में आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई स्मार्ट क्लास योजना की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। झारखंड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल द्वारा जारी 1 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 439 आदर्श विद्यालयों के बीच हुई इस प्रतिस्पर्धा में राजधानी रांची का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि राज्य के सर्वश्रेष्ठ 25 स्कूलों की सूची में रांची का एक भी विद्यालय अपनी जगह सुरक्षित नहीं कर पाया।

जहाँ एक ओर राजधानी पिछड़ती नजर आई, वहीं गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और लोहरदगा जैसे जिलों ने डिजिटल शिक्षा के क्रियान्वयन में बाजी मार ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, गिरिडीह जिले का एचएस पचंबा पूरे झारखंड में प्रथम स्थान पर रहा है। यहाँ के शिक्षकों और प्रबंधन ने न केवल स्मार्ट क्लास का अधिकतम उपयोग किया, बल्कि पोर्टल पर डेटा अपलोड करने में भी तत्परता दिखाई। देवघर और जामताड़ा के स्कूलों ने भी तकनीकी रिपोर्टिंग और नियमित संचालन में निरंतरता बनाए रखते हुए शीर्ष रैंकिंग में अपना दबदबा कायम रखा।

शिक्षा क्षेत्र के जानकारों और विभागीय अधिकारियों के लिए रांची का यह प्रदर्शन चिंता का विषय है। राजधानी होने के नाते यहाँ संसाधनों, इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीकी सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, फिर भी रैंकिंग में पिछड़ना प्रशासनिक और मॉनिटरिंग स्तर की विफलता को दर्शाता है। यह माना जा रहा है कि रांची के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास संचालित तो हो रही हैं, लेकिन  पोर्टल पर उनके उपयोग का डेटा नियमित रूप से अपडेट नहीं किया जा रहा है। विद्यालय स्तर पर उचित पर्यवेक्षण की कमी के कारण राज्य स्तर पर जिले की छवि प्रभावित हुई है।

शिक्षा विभाग ने इस रिपोर्ट के बाद स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद प्रदर्शन न करने वाले स्कूलों पर सख्ती बरती जाएगी। डिजिटल शिक्षण को केवल उपकरणों तक सीमित न रखकर उसे वास्तविक शिक्षा का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। अधिकारियों का मानना है कि यदि रांची के स्कूल पोर्टल पर डेटा एंट्री की प्रक्रिया को दुरुस्त कर लें और डिजिटल टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल करें, तो स्थिति में सुधार संभव है। वर्तमान रिपोर्ट यह संदेश देती है कि डिजिटल युग में केवल संसाधन होना पर्याप्त नहीं, उनका सक्रिय उपयोग और पारदर्शी रिपोर्टिंग भी उतनी ही जरूरी है।