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रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में गहराया मानवीय संकट

पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओँ की कमी

टालिन: यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के लगभग चार साल बाद, स्थिति अब भी भयावह बनी हुई है। वर्तमान में रूस यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है। एक अनुमान के अनुसार, इन क्षेत्रों में रह रहे 30 से 50 लाख लोग आवास, पानी, बिजली, हीटिंग और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं।

डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया जैसे क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर है कि स्वयं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी यहाँ कई वास्तव में गंभीर और तत्काल समस्याओं की उपस्थिति को स्वीकार किया है। फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के कुछ महीनों बाद मॉस्को ने अवैध रूप से इन क्षेत्रों का विलय कर लिया था। यहाँ के निवासियों पर रूसी नागरिकता, भाषा और संस्कृति जबरन थोपी जा रही है, और स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वहां से भाग निकलने वाले लोगों के अनुसार, निवासी हर पल इस डर में जीते हैं कि कहीं उन पर कीव (यूक्रेन) के प्रति सहानुभूति रखने का आरोप न लग जाए। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज की प्रमुख ओलेक्सांद्रा मतविइचुक के अनुसार, रूस ने गुप्त और आधिकारिक हिरासत केंद्रों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया है, जहाँ हजारों यूक्रेनी नागरिकों को बिना किसी आरोप के अनिश्चित काल के लिए रखा गया है।

लुहान्स्क क्षेत्र की रहने वाली इनना वनुकोवा ने कब्जे के शुरुआती दिन अपने परिवार के साथ एक सीलन भरे तहखाने में छुपकर बिताए। उनके गांव कुद्रियाशिवका में रूसी सैनिकों ने चौकियों की स्थापना की, घरों को लूटा और लगातार गोलाबारी की। इनना और उनके पति ओलेक्सी, जो सरकारी कर्मचारी थे, सैनिकों के मुख्य निशाने पर थे।

मार्च 2022 में इनना अपने 16 वर्षीय बेटे के साथ सफेद चादर लहराते हुए मोर्टार की आग के बीच वहां से भागने में सफल रहीं। उनके पति ओलेक्सी को रूसी सैनिकों ने दो बार जान से मारने की धमकी दी, जिसके बाद वे भी वहां से निकलने में कामयाब रहे। अब यह परिवार एस्टोनिया में एक नया जीवन जी रहा है, लेकिन उनके माता-पिता और गांव के अन्य 150 लोग अब भी वहां केवल जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

मई 2022 में रूसी सेना के कब्जे में आने से पहले मारियुपोल ने हफ्तों तक घेराबंदी और बमबारी झेली। 16 मार्च 2022 को डोनेट्स्क ड्रामा थिएटर पर हुए हमले ने दुनिया को झकझोर दिया था, जहाँ एक ही हमले में लगभग 600 नागरिक मारे गए थे। आज भी इन इलाकों में बुनियादी ढांचे पूरी तरह ध्वस्त हैं और लोग कड़ाके की ठंड में हीटिंग और पानी जैसी सुविधाओं के बिना रहने को मजबूर हैं।