Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
AI vs Justice: अदालती फैसलों में AI का अनियंत्रित इस्तेमाल खतरनाक, सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञ समिति ब... Bombay High Court News: ‘सरकार के खिलाफ नारे लगाना निष्कासन का आधार नहीं’, हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई... Patna Bungalow Controversy: राबड़ी देवी ने खाली किया सरकारी बंगला, लालू परिवार अब कौटिल्य नगर स्थित ... Brij Bhushan Sharan Singh Case: यौन शोषण मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 अगस्त को ... NADA Doping Bill 2026: डोपिंग अब बनेगा गंभीर अपराध, कोच और ड्रग सप्लायर को होगी 5 साल की जेल BMC Action: खुले मैनहोल में गिरने से व्यक्ति की मौत, बीएमसी ने दी 10 लाख की सहायता; जांच के लिए समित... Ram Niwas Mandir Dispute: राम मंदिर परिसर के पास पंचायती मंदिर पर कब्जे का आरोप, ट्रस्ट के महासचिव प... Assembly By-election 2026: बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की 3 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 30 जुलाई को ह... Delhi School Fee Rule: निजी स्कूलों को 15 जुलाई तक गठित करनी होगी फीस समिति, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ... College Street Makeover: अग्निमित्रा पॉल के प्रस्ताव का विरोध, हॉकरों की आजीविका और सौंदर्यीकरण के ब...

अमेरिका ने ईरान के पास सैन्य मौजूदगी बढ़ायी

ईरान को दिये गये ट्रंप की चेतावनी के बीच सैन्य घेराबंदी

वाशिंगटन: मध्य पूर्व में युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल भंडार पर समझौता करने के लिए मात्र 10 से 15 दिनों की समय सीमा दी है। इस अल्टीमेटम के साथ ही अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को उस स्तर पर पहुँचा दिया है, जो 2003 के इराक युद्ध के बाद से नहीं देखा गया।

सैन्य खुफिया विश्लेषकों और फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने 120 से अधिक सैन्य विमान इस क्षेत्र में तैनात किए हैं। इनमें एफ-35 स्टील्थ फाइटर और एफ-22 एयर सुपीरियरिटी जेट है जो रडार की नजर में आए बिना हमला करने में सक्षम हैं। वहां पर ई 3 सेंट्री विमान हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली के रूप में काम करते हैं, जो पूरे युद्ध क्षेत्र पर नजर रखते हैं।

बी -2 स्टील्थ बॉम्बर: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बी-2 बॉम्बर्स की हलचल बढ़ती है, तो यह जून 2025 में हुए ऑपरेशन मिडनाइट हैमर (ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमला) जैसा दोबारा हमला होने का संकेत हो सकता है। समुद्र में दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक पोत, यूएसएश जेराल्ड आर. फोर्ड, अब अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ अरब सागर में शामिल होने जा रहा है।

हालांकि, इस सैन्य जमावड़े ने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच एक कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है। हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य बेस के उपयोग को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान पर हमले के लिए ब्रिटिश संप्रभुता वाले ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। इसके जवाब में ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने के ब्रिटेन के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में ईरान ने कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी अमेरिकी आक्रामकता का जवाब निर्णायक और आनुपातिक तरीके से दिया जाएगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनियंत्रित परिणाम के लिए पूरी तरह से अमेरिका जिम्मेदार होगा।