सुनामी की चेतावनी और भारी तबाही की आशंका
जकार्ता: दक्षिण-पूर्व एशिया का द्वीपीय राष्ट्र इंडोनेशिया आज एक बार फिर प्रकृति के प्रकोप से दहल उठा। आज तड़के इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पश्चिमी तट पर रिक्टर पैमाने पर 7.1 तीव्रता का एक अत्यंत शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का झटका इतना तीव्र था कि इसने न केवल इंडोनेशिया, बल्कि पड़ोसी देशों मलेशिया और थाईलैंड तक को झकझोर कर रख दिया।
इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र समुद्र के नीचे लगभग 20 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। कम गहराई पर केंद्र होने के कारण कंपन की मारक क्षमता बहुत अधिक महसूस की गई। जैसे ही धरती कांपी, एजेंसी ने तुरंत तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी, जिससे तटीय बस्तियों में अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने लोगों को समुद्र तट से दूर ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
स्थानीय समयानुसार यह आपदा उस समय आई जब लोग गहरी नींद में थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कंपन कई सेकंड तक जारी रहा, जिससे खिड़कियों के कांच टूट गए, बिजली के खंभे गिर गए और कई पुरानी इमारतों में गहरी दरारें आ गईं। सुमात्रा के प्रमुख शहरों में लोग दहशत के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए और सड़कों पर जमा हो गए।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों मकान जमींदोज हो गए हैं। स्थानीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मलबे में कई लोग दबे हो सकते हैं। बिजली और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण दूरदराज के इलाकों से सटीक जानकारी जुटाने में काफी कठिनाई हो रही है।
इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इसे दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक बनाती है। यह देश प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर स्थित है, जहाँ टेक्टोनिक प्लेटें लगातार आपस में टकराती रहती हैं। हालांकि यहाँ छोटे-मोटे झटके आम हैं, लेकिन 7.1 की तीव्रता का यह भूकंप हाल के वर्षों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है।
इंडोनेशियाई खोज और बचाव एजेंसी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अपनी टीमें रवाना कर दी हैं। भारी मशीनों और चिकित्सा दलों को सुमात्रा की ओर भेजा गया है। पड़ोसी देशों मलेशिया और थाईलैंड में भी ऊंची इमारतों को सुरक्षा के लिहाज से खाली करा लिया गया है। वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान अगले कुछ घंटों पर है, जो राहत कार्यों और सुनामी के संभावित खतरे के आकलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।