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ग्रीनलैंड पूरी तरह डेनमार्क का हिस्सा है: रूस

पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड की खुली आलोचना हुई

मॉस्को: रूस ने वैश्विक भू-राजनीति में पश्चिमी देशों की भूमिका पर कड़ा प्रहार करते हुए ग्रीनलैंड की संप्रभुता को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अभिन्न क्षेत्र है, और इसके राजनीतिक भविष्य को लेकर किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। इस बयान के माध्यम से रूस ने विशेष रूप से अमेरिका और नाटो देशों पर दोहरे मानकों का आरोप लगाया है।

रूस का यह बयान उस समय आया है जब आर्कटिक क्षेत्र में संसाधनों और रणनीतिक नियंत्रण को लेकर वैश्विक खींचतान बढ़ गई है। रूसी प्रवक्ता ने तर्क दिया कि एक तरफ पश्चिमी देश यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे अक्सर ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्रों की स्वायत्तता या भविष्य के स्वामित्व को लेकर ऐसी चर्चाएं शुरू कर देते हैं जो अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन करती हैं।

रूस ने याद दिलाया कि 2019 और उसके बाद के वर्षों में अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को खरीदने या वहां अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने के जो संकेत मिले थे, वे पश्चिमी देशों के उस पाखंड को दर्शाते हैं जहाँ वे अपनी सुविधानुसार स्वतंत्रता और संप्रभुता की परिभाषा बदल लेते हैं।

आर्कटिक क्षेत्र धीरे-धीरे वैश्विक शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा का नया केंद्र बन रहा है। ग्रीनलैंड इस क्षेत्र में अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण अत्यधिक महत्वपूर्ण है। रूस, जो खुद आर्कटिक का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है, यह नहीं चाहता कि अमेरिका या नाटो ग्रीनलैंड के माध्यम से अपनी सैन्य पहुंच को और मजबूत करें। रूस ने कहा कि डेनमार्क के इस स्वायत्त क्षेत्र पर किसी भी प्रकार का अमेरिकी दबाव उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र की शांति को भंग कर सकता है।

रूसी राजनयिकों के अनुसार, पश्चिम को दूसरों को लोकतंत्र और अखंडता का पाठ पढ़ाने से पहले अपने स्वयं के कार्यों का आकलन करना चाहिए। रूस ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का अधिकार निर्विवाद है और इसे किसी भी सौदेबाजी या रणनीतिक विस्तार का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

रूस का यह रुख केवल ग्रीनलैंड के प्रति सहानुभूति नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल है। इसके जरिए मॉस्को ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह दिखाने की कोशिश की है कि पश्चिम के नियम केवल उन्हीं देशों पर लागू होते हैं जिन्हें वे अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। यह बयान आने वाले समय में आर्कटिक काउंसिल और ध्रुवीय राजनीति में नए विवादों को जन्म दे सकता है।