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सीरिया में 35 से अधिक ठिकानों पर बम बरसाये

यूके और फ्रांस के बाद अब यूएसए ने भी आई पर हमला किया

वाशिंगटनः सीरिया की धरती एक बार फिर धमाकों से गूंज उठी है, लेकिन इस बार निशाना वे आतंकी ठिकाने थे जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बने हुए थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के तहत इस्लामिक स्टेट (IS) के ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है। यह कार्रवाई पिछले साल 13 दिसंबर को अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक अनुवादक पर हुए घात लगाकर किए गए हमले का सीधा जवाब है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्पष्ट निर्देशों के बाद, अमेरिकी वायुसेना ने अपनी पूरी ताकत के साथ आईएस के गढ़ों को निशाना बनाया।

सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और रणनीतिक प्रहार इस सैन्य अभियान की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 20 से अधिक उन्नत लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया। पेंटागन के अनुसार, इन विमानों ने 35 से अधिक महत्वपूर्ण ठिकानों पर 90 से अधिक प्रिसिजन गाइडेड म्यूनिशन्स (सटीक मार करने वाले हथियार) गिराए।

इस ऑपरेशन में केवल अमेरिकी विमान ही नहीं, बल्कि जॉर्डन के एफ-16 लड़ाकू विमानों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर हिस्सा लिया, जो इस क्षेत्र में आतंकवाद के खिलाफ बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर कड़ा संदेश देते हुए कहा, यह युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि प्रतिशोध की घोषणा है। जो हमारे योद्धाओं को नुकसान पहुँचाएंगे, हम उन्हें दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढकर खत्म कर देंगे।

सीरिया का नया राजनीतिक परिदृश्य यह हमले एक ऐसे समय में हुए हैं जब सीरिया अपने इतिहास के सबसे बड़े बदलाव से गुजर रहा है। दिसंबर 2024 में 13 साल लंबे गृहयुद्ध के बाद बशर अल-असद के शासन का पतन हो गया। अब अहमद अल-शरा (जिन्हें अबू मोहम्मद अल-जोलानी के नाम से भी जाना जाता है) देश के नए राष्ट्रपति के रूप में सत्ता संभाल रहे हैं। असद शासन के गिरने के बाद देश में सुरक्षा व्यवस्था अभी भी नाजुक है, जिसका फायदा उठाकर आईएस के स्लीपर सेल पूर्वोत्तर सीरिया में फिर से सिर उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

यद्यपि 2019 में आईएस का भौतिक खिलाफत खत्म हो गया था, लेकिन इसके लड़ाके अब भी गुरिल्ला हमलों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। अमेरिकी सेना का ताजा हमला यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सीरिया में सत्ता परिवर्तन के दौरान पैदा हुए पावर वैक्यूम (शक्ति शून्यता) का लाभ आतंकवादी संगठन न उठा सकें। ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक ने स्पष्ट कर दिया है कि नई अमेरिकी प्रशासन की नीति आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की है।