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ग्रीनलैंड को हासिल करने पर ट्रंप प्रशासन गंभीर

व्हाइट हाउस ने औपचारिक तौर पर विकल्पों की बात कही

वाशिंगटनः व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को संयुक्त राज्य अमेरिका में शामिल करने के लिए विकल्पों की एक श्रृंखला पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का अधिग्रहण अब अमेरिका के लिए एक राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कमांडर-इन-चीफ के पास सैन्य शक्ति का उपयोग करने का विकल्प हमेशा उपलब्ध रहता है, विशेष रूप से तब जब आर्कटिक क्षेत्र में विरोधियों (रूस और चीन) को रोकने की बात हो।

राष्ट्रपति ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड अपनी रणनीतिक स्थिति और खनिज संपदा के कारण अमेरिकी रक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि यह द्वीप रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है और डेनमार्क इसकी सुरक्षा करने में सक्षम नहीं है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हालिया गिरफ्तारी के बाद इस मुद्दे ने और जोर पकड़ लिया है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन अब अपने विदेशी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप को एक प्रभावी उपकरण के रूप में देख रहा है। अमेरिका ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत भी नियुक्त किया है, जो इस द्वीप को डेनमार्क से अलग इकाई के रूप में देखने के अमेरिकी इरादे का संकेत है।

इस घोषणा ने पूरे यूरोप में आक्रोश और चिंता की लहर पैदा कर दी है। डेनिश प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने इस विचार को बेतुका बताते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि किसी नाटो सहयोगी पर अमेरिकी हमला सब कुछ खत्म कर देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो यह न केवल नाटो गठबंधन का अंत होगा, बल्कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से स्थापित वैश्विक सुरक्षा ढांचे को भी ध्वस्त कर देगा। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय सहयोगियों ने भी डेनमार्क के साथ एकजुटता दिखाते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ग्रीनलैंड अपने लोगों का है और इसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए।

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने ट्रंप के बयानों को अपमानजनक और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड कोई ऐसी वस्तु नहीं है जिसे कोई भी अपनी इच्छा से कब्जा ले। द्वीप की 57,000 की आबादी के बीच इस संभावित अधिग्रहण को लेकर भारी डर और विरोध है। स्थानीय लोग इसे अपनी संप्रभुता और पहचान पर सीधा हमला मान रहे हैं। हालांकि ग्रीनलैंड में डेनमार्क से स्वतंत्रता की मांग उठती रही है, लेकिन वे अमेरिका का हिस्सा बनने के विचार को पूरी तरह से नकारते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा राजनयिक और सैन्य संकट बन सकता है।