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रिलायंस ने रूसी तेल से इंकार कर दिया

डोनाल्ड ट्रंप की परोक्ष धमकी का भारत में सीधा असर दिखा

  • ब्लूमबर्ग ने इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की थी

  • जामनगर रिफाइनरी में तेल आने की खबर

  • कंपनी ने कहा कोई तेल नहीं लाया गया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने मंगलवार, 6 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि कंपनी रूसी कच्चे तेल की नई खेप प्राप्त कर रही है। रिलायंस ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पिछले लगभग तीन हफ्तों से जामनगर रिफाइनरी को रूसी तेल का कोई भी कार्गो प्राप्त नहीं हुआ है और न ही जनवरी महीने में ऐसी कोई डिलीवरी अपेक्षित है। कंपनी ने ब्लूमबर्ग की उस रिपोर्ट को पूरी तरह से असत्य करार दिया जिसमें कहा गया था कि रूसी तेल से लदे तीन जहाज रिलायंस के जामनगर परिसर की ओर बढ़ रहे हैं।

यह स्पष्टीकरण भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समय पर आया है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फ़ोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर अपनी नाखुशी जाहिर की थी। ट्रंप ने कहा था, प्रधानमंत्री मोदी एक बहुत अच्छे इंसान हैं और वे जानते थे कि मैं (रूस के साथ तेल व्यापार से) खुश नहीं था। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। ट्रंप के इस बयान के बाद रिलायंस का यह खंडन वैश्विक स्तर पर भारत की व्यापारिक नीतियों और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन को दर्शाता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज, जो हाल तक रूसी कच्चे तेल की भारत में सबसे बड़ी खरीदार थी, ने 20 नवंबर 2025 को ही यह घोषणा कर दी थी कि उसने अपनी केवल-निर्यात वाली रिफाइनरी में रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण बंद कर दिया है। जामनगर स्थित रिलायंस का यह विशाल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स दो हिस्सों में बंटा है। एक इकाई विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंतर्गत आती है जहाँ से पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे बाजारों में निर्यात किए जाते हैं, जबकि दूसरी पुरानी इकाई मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है।

चूंकि यूरोपीय संघ ने रूसी ऊर्जा राजस्व को लक्षित करने के लिए कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, रिलायंस ने अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हितों और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए यह रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी अब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन कर रही है ताकि उसके निर्यात बाजार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। राष्ट्रपति ट्रंप की टिप्पणियों और रिलायंस के इस कड़े रुख से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में वैश्विक तेल बाजार और भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।