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सऊदी अरब का हवाई हमले का परिणाम अब सामने आया

दक्षिणी यमन में सात की मौत की खबर

हद्रमौतः यमन, जो पिछले एक दशक से भी अधिक समय से भीषण गृहयुद्ध की मार झेल रहा है, वहां शुक्रवार को तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन के भीतर ही अपने सहयोगी रहे दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एसटीसी) के ठिकानों पर जोरदार हवाई हमले किए।

अल-खासा सैन्य शिविर पर किए गए इन सात हवाई हमलों में कम से कम सात अलगाववादी लड़ाकों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब और एसटीसी (जिसे संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन प्राप्त है) दोनों ही सैद्धांतिक रूप से उत्तर में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ एक ही खेमे का हिस्सा रहे हैं।

हालिया संघर्ष की जड़ें पिछले महीने शुरू हुई थीं, जब एसटीसी ने तेल समृद्ध हद्रमौत और महरा प्रांतों के बड़े हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सऊदी समर्थित यमनी सरकार के नियंत्रण में रहे हैं। एसटीसी के सैन्य प्रवक्ता ने इन हमलों के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वे अब सऊदी समर्थित ताकतों के खिलाफ एक निर्णायक और अस्तित्वगत युद्ध में हैं।

उन्होंने इस लड़ाई को कट्टरपंथी इस्लामवाद के खिलाफ संघर्ष करार दिया। वहीं, सऊदी अरब का कहना है कि यह हवाई हमले तब किए गए जब एसटीसी ने शांतिपूर्ण तरीके से सैन्य ठिकानों को सौंपने की अपील को ठुकरा दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आपसी टकराव ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को और मजबूत कर सकता है, क्योंकि सरकार समर्थक गठबंधन के बीच की फूट अब खुलकर सामने आ गई है। हद्रमौत के गवर्नर सलेम अल-खानबशी ने इन अभियानों को शांतिपूर्ण हस्तांतरण की कोशिश बताया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है।

अदन हवाई अड्डे को एसटीसी द्वारा बंद किए जाने और सऊदी प्रतिनिधिमंडल को उतरने से रोकने की खबरों ने कूटनीतिक गतिरोध को और बढ़ा दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपनी नाराजगी जताते हुए अपनी शेष सेना को वापस बुलाने की घोषणा की है, जिससे यमन में शांति बहाली की प्रक्रिया अब अधर में लटकती नजर आ रही है।