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देश भर में ईएसआईसी में 20,000 मामले लंबित

सामाजिक सुरक्षा अनुपालन के लिए एमनेस्टी योजना शुरू

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत दशकों से लंबित कानूनी विवादों को खत्म करने और नियोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ईएसआईसी से जुड़े लगभग 20,000 मुकदमों को सुलझाने के लिए एक विशेष ‘एमनेस्टी’ (क्षमादान) योजना की घोषणा की है। इन लंबित मामलों में लगभग ₹1,700 करोड़ की बड़ी राशि फंसी हुई है। इस महत्वाकांक्षी योजना को 1 अक्टूबर 2025 से लागू किया जाएगा, जो 30 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।

अदालती बोझ कम करने की कवायद श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी ने हाल ही में 17 दिसंबर को इस योजना की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में मंत्रालय और निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि ईएसआईसी ने पहले ही विभिन्न अदालतों में चल रहे 258 मामलों को वापस लेने के लिए आवेदन कर दिया है। दूसरी ओर, करीब 1,552 नियोक्ताओं और कंपनियों ने भी इस योजना के तहत अपने विवादों को खत्म करने की इच्छा जताते हुए आवेदन जमा किए हैं। यह योजना उन सभी मामलों को कवर करेगी जो 31 मार्च 2025 तक दर्ज किए गए हैं।

जटिल मामलों का होगा निपटारा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, लंबित मामलों में से कई पाँच साल से भी अधिक पुराने हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या उन बंद हो चुकी फैक्ट्रियों की है, जिनका अब कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या जिनके मालिक अब ट्रेस नहीं किए जा पा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, एमनेस्टी योजना के तहत निर्धारित प्रतिशत का भुगतान कर मामलों को बंद करने का विकल्प दिया गया है। ईएसआईसी अधिनियम के उल्लंघन में मुख्य रूप से अंशदान का समय पर भुगतान न करना, कर्मचारियों के वेतन से कटौती के बावजूद उसे निगम में जमा न करना और फर्जी रिकॉर्ड पेश करना शामिल है। इन उल्लंघनों के लिए वर्तमान में भारी जुर्माना और दो साल तक की जेल का प्रावधान है।

नियोक्ताओं के लिए सुनहरा अवसर इस नई योजना के तहत, यदि कोई नियोक्ता अपनी गलती स्वीकार करते हुए वास्तविक बकाया अंशदान और उस पर लगने वाले ब्याज का भुगतान करने को तैयार होता है, तो निगम उसके खिलाफ चल रहे आपराधिक या दीवानी मामले वापस ले लेगा। सबसे बड़ी राहत यह है कि ऐसे मामलों में कोई अतिरिक्त पेनल्टी या हर्जाना नहीं लगाया जाएगा।

ईएसआईसी के क्षेत्रीय कार्यालयों को इस प्रक्रिया को तेजी से निपटाने के लिए आवश्यक अधिकार दिए गए हैं। इस पहल से न केवल अदालतों पर बोझ कम होगा, बल्कि करोड़ों रुपये का फंसा हुआ राजस्व भी सरकार को प्राप्त हो सकेगा।