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जबलपुर में कृषि विभाग की अनूठी पहल, लाइव आकर अधिकारियों ने किसानों की प्रॉब्लम सॉल्व की

जबलपुर: कृषि विभाग के अधिकारियों ने सरकारी कामकाज के परंपरागत रवैया को तोड़ते हुए एक नया प्रयोग किया है. अधिकारियों ने सोशल मीडिया के जरिए लाइव किसानों से जुड़कर उनकी समस्याओं का निदान करने का प्रयास किया. कृषि विभाग के अधिकारी जबलपुर में खाद वितरण के ई टोकन प्रणाली पर किसानों के जवाब देने के लिए बैठे थे. इस 1 घंटे के लाइव को 900 से ज्यादा किसानों ने देखा और 100 से ज्यादा किसानों ने अधिकारियों से सवाल जवाब किए. सरकारी अधिकारियों द्वारा जनता की समस्या सुनने का लाइव प्रयोग संभवत: पहली बार हुआ है.

कृषि विभाग जबलपुर ने किया नवाचार

सामान्य तौर पर सरकारी दफ्तरों का कामकाज एकदम परंपरागत तरीके से होता है. जैसे आपको किसी सरकारी कर्मचारी से मदद चाहिए तो पहले आवेदन देना होगा. जिसमें समस्या के बारे में उन्हें अवगत करना होगा. इसके अलावा बीते कुछ दिनों से सरकार ने लोगों की शिकायतों को सुनने के लिए कॉल सेंटर शुरू किए हैं. जिनके बाकायदा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं. इन नंबरों पर कॉल करके व्यक्ति अपनी समस्या संबंधित विभाग के अधिकारी से बता सकता है.

लेकिन इन सभी तरीकों में भी समय लगता था. इसलिए सरकार ने ऑनलाइन जनसुनवाई शुरू करने की नई पहल की शुरुआत की. इसके जरिए दूर दराज बैठा व्यक्ति भी सोशल मीडिया लाइव पर जुड़कर अपनी बात संबंधित विभाग के अधिकारियों के समक्ष रख सकता है. साथ ही उसे तत्काल समाधान मिलने का ज्यादा चांस होता है.

कृषि विभाग ने लाइव सुनी किसानों की परेशानी

शुक्रवार 19 दिसंबर को यह जबलपुर के कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा पहली बार किया गया. सरकारी व्यवस्था में आज तक नहीं हुआ था. कृषि विभाग के संयुक्त संचालक एसके निगम अपने एक साथी अधिकारी के साथ सोशल मीडिया पर लाइव आए और ई टोकन आधारित रासायनिक खाद वितरण प्रणाली के सवालों के जवाब दिए. वहीं किसानों ने भी बढ़-चढ़कर अपने सवाल रखे.

खाद की कमी का मुद्दा रहा छाया

ऑनलाइन जुड़े किसान पंडित दामोदर ने बताया, “एक बार में केवल 50 बोरी खाद दी जा रही है. इस लिमिट को बढ़ाया जाए क्योंकि जिन किसानों के पास ज्यादा रकबा है उन्हें ज्यादा खाद की जरूरत है.” रितेश पटेल नाम के किसान ने अपने सवाल में लिखा कि “जब आपने ई टोकन की व्यवस्था कर दी है, तो खाद की कमी क्यों हो रही है.”

सवालों से जवाब पाकर संतुष्ट हुए किसान

कृषि अधिकारी एस के निगम का कहना है, “यह प्रयोग बहुत ही सफल रहा. इसमें लोगों की समस्याओं का तुरंत निदान हो पाया. इन्हीं सवालों के जवाब के लिए किसानों को कृषि विभाग के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ते थे और छोटे अधिकारियों के पास इसकी जानकारी नहीं होती थी.” एस के निगम का कहना है कि “यह प्रयोग सफल रहा है और अब इसे 4 जनवरी को दोबारा दोहराया जाएगा और धान खरीदी से जुड़े हुए सवालों के जवाब देने के लिए अधिकारी एक साथ बैठेंगे.”