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तेलंगाना पंचायत चुनाव के अंतिम चरण में 85 फीसद मतदान

स्थानीय निकाय के चुनावों के प्रति आम मतदाता सक्रिय

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: तेलंगाना में स्थानीय स्वशासन की नींव को मजबूत करने के लिए आयोजित ग्राम पंचायत चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण में बुधवार को मतदाताओं का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस अंतिम चरण में 85 प्रतिशत से अधिक पात्र मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आयोग ने पुष्टि की है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया राज्य भर में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और मतदान खत्म होने के तुरंत बाद मतों की गिनती का कार्य शुरू कर दिया गया।

सांख्यिकीय विवरण देते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि इस चरण में कुल 50,56,344 पात्र मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें से 43,37,024 लोगों ने लोकतंत्र के इस उत्सव में हिस्सा लिया। इसके साथ ही अंतिम चरण का कुल मतदान प्रतिशत 85.77 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह मतदान प्रक्रिया 3,752 ग्राम पंचायतों में फैली 28,410 वार्ड सदस्य सीटों के लिए आयोजित की गई थी। ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं, जो स्थानीय विकास के प्रति लोगों की जागरूकता को दर्शाती हैं।

कानून-व्यवस्था की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) महेश एम. भागवत ने बताया कि पुलिस की मुस्तैदी के कारण कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। चुनावी मैदान की बात करें तो इस चरण में सरपंच पदों के लिए 12,652 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे थे, जबकि वार्ड सदस्य के पदों के लिए 75,725 प्रत्याशी चुनावी रण में थे।

चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया गया। मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव, पुलिस महानिदेशक बी. शिवधर रेड्डी और राज्य चुनाव आयुक्त रानी कुमुदिनी ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालय से वेबकास्टिंग के माध्यम से संवेदनशील केंद्रों की लाइव समीक्षा की। मुख्य सचिव राव ने कहा कि भविष्य के चुनावों में और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वेबकास्टिंग तकनीक का विस्तार किया जाएगा।

गौरतलब है कि तीन चरणों में हुए इन चुनावों के पहले चरण (11 दिसंबर) में 84.28 प्रतिशत और दूसरे चरण (14 दिसंबर) में 85.86 प्रतिशत मतदान हुआ था। हालांकि, ये चुनाव तकनीकी रूप से गैर-दलीय आधार पर लड़े गए हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस, बीआरएस और भाजपा की ग्रामीण पकड़ के लिटमस टेस्ट के रूप में देख रहे हैं। वर्तमान में सरकार ने केवल ग्राम पंचायतों के चुनाव ही कराए हैं, जबकि जिला परिषद के चुनावों को पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी कानूनी अड़चनों के कारण फिलहाल टाल दिया गया है।