बीजापुर: नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में आत्मसमर्पित माओवादियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पुनर्वास एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रम चलाया जा रहा है. सरेंडर नक्सलियों को हथियार छोड़ने के बाद समाज और परिवार के बीच सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्हें शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार की नई दिशा दी जा रही है.
सरेंडर माओवादियों ने लाइब्रेरी में की पढ़ाई
सरेंडर माओवादियों को बीजापुर स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी ले जाया गया. उन्हें पुस्तक, ज्ञानवर्धक सामग्री, विश्व मानचित्र और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विषयों की जानकारी दी गई. टेलीस्कोप के जरिए चांद, तारे और ग्रहों को दिखाकर विज्ञान की दुनिया से रूबरू कराया गया.
सरेंडर माओवादियों को ट्रेनिंग
- ट्रैक्टर चलाने की ट्रेनिंग
- सिलाई, बागवानी
- पशुपालन, तकनीकी, व्यावसायिक प्रशिक्षण
- बीजापुर के पुनर्वास केंद्र में यह सभी ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि वे भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें.
पुनर्वास से पुनर्जीवन, संवर रहा सरेंडर माओवादियों का भविष्य
बीजापुर उप पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार साहू ने बताया कि पुनर्वास की दिशा में प्रशासन और पुलिस विभाग हर संभव सहायता जारी रखेगा. वहीं पुनर्वास केंद्र संचालक गौरव पांडे ने बताया कि लाइब्रेरी भ्रमण ने आत्मसमर्पित साथियों के भीतर जिज्ञासा, सकारात्मक सोच और जीवन में आगे बढ़ने का उत्साह पैदा किया है. सभी बहुत खुश और प्रेरित नजर आए.
‘शांति, विकास और विश्वास की मजबूत नींव’
बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जीतेन्द्र यादव ने कहा, ”यह पुनर्वास प्रयास बीजापुर में शांति, विकास और विश्वास की मजबूत नींव रख रहा है. समाज से भी अपील की गई है कि मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करने वालों का प्रोत्साहन और सहयोग करें ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति का मार्ग और अधिक सशक्त हो सके.”