तुर्किए में सरकार का दमनात्मक रवैया निरंतर जारी
इस्तांबुलः हाल ही में तुर्किए में एक बड़ा राजनीतिक और घटनात्मक भूचाल तब आया जब राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी और एक प्रमुख विपक्षी नेता को गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी ने तुर्किए की पहले से ही अस्थिर राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है और आगामी चुनावों में सत्ता संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ने की आशंका है।
विपक्षी नेता पर भ्रष्टाचार, देशद्रोह और सरकार विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, विपक्षी दल और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस कदम को राजनीतिक प्रतिशोध और एर्दोगान की सत्ता को चुनौती देने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
तुर्किए में इस समय राजनीतिक तनाव कई कारणों से बढ़ रहा है। सबसे पहले, देश एक गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जहाँ महंगाई दर आसमान छू रही है और जनता में सरकार के प्रति भारी असंतोष है। विपक्षी दल इसी आर्थिक असंतोष को भुनाकर एर्दोगान की पार्टी को चुनौती दे रहे थे। दूसरे, एर्दोगान सरकार पर मीडिया, न्यायपालिका और विपक्षी नेताओं की स्वतंत्रता पर लगातार नियंत्रण बढ़ाने का आरोप लगता रहा है। यह गिरफ्तारी इसी बढ़ती हुई सत्तावादी प्रवृत्ति की पराकाष्ठा मानी जा रही है।
इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद तुर्किए के कई प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी आलोचना हो रही है। पश्चिमी देशों और यूरोपीय संघ ने मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर चिंता व्यक्त करते हुए तुर्किए पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।
तुर्किए, जो नाटो का एक महत्वपूर्ण सदस्य है, पश्चिमी देशों के साथ अपने पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों को और बिगाड़ सकता है। यह घटना तुर्किए के लोकतंत्र की गुणवत्ता और उसके भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह भी दर्शाती है कि एर्दोगान अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।