Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
समुद्री प्लास्टिक और मछली जाल से बन रही सड़क, देखें वीडियो Physical Intelligence in India: भारत में आई नई तकनीक, MEIL और Analog की साझेदारी से बदलेगा इंफ्रास्ट... Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर पुलिस पर उठे सवाल, हत्या के नामजद आरोपी अधिकारी को मिली नई जिम्मेदार... Voter List Revision: मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) पर मौलाना अरशद मदनी ने जताई चिंता, प्रक्रिया पर ... Karnataka High Court: वकील के साथ मारपीट करने वाली महिला PSI पर कोर्ट सख्त, लगाया 1 लाख का जुर्माना Supaul News: बिहार के सुपौल में मानवता शर्मसार, 1 साल तक कमरे में बंद रही नाबालिग बच्ची; मां को बेचन... Supreme Court PIL: डिजिटल कंटेंट के लिए रेगुलेटरी सिस्टम की मांग, '₹370 की बिरयानी' विवाद पर सुप्रीम... CM Dr. Mohan Yadav in Seoni: सिवनी को मिली 494 करोड़ की सौगात, सीएम यादव ने बांटे कोदो-कुटकी बोनस Jaunpur News: दूल्हा आजाद बिंद हत्याकांड के एक लाख के इनामी आरोपी भोले राजभर ने किया सरेंडर Monsoon Update: 'अल नीनो' के खतरे पर पीएम मोदी सख्त, राज्यों को पानी बचाने और आपदा प्रबंधन के लिए कि...

बदलती क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की परेशानी बढ़ी

तालिबान विदेश मंत्री के भारत दौरे से चिंता

काबुलः अगस्त 2025 में, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री, आमिर खान मुत्ताकी, का भारत दौरा एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम रहा। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह काबुल से नई दिल्ली की पहली उच्च स्तरीय वार्ता थी। यह दौरा वैश्विक घटनाक्रम के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भारत की पड़ोसी पहले की कूटनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है, जबकि साथ ही क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में पाकिस्तान की भूमिका पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने मानवीय सहायता, सुरक्षा चिंताओं और द्विपक्षीय व्यापार के भविष्य पर चर्चा की।

भारत ने औपचारिक रूप से तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है, लेकिन क्षेत्रीय स्थिरता और अपने रणनीतिक हितों को देखते हुए व्यावहारिक जुड़ाव बनाए रखना उसकी मजबूरी भी है और आवश्यकता भी। नई दिल्ली के लिए, अफगानिस्तान में अपने विकास परियोजनाओं की सुरक्षा, और सबसे महत्वपूर्ण, यह सुनिश्चित करना कि अफगान भूमि का उपयोग भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों के लिए न हो, सर्वोपरि है। मुत्ताकी के दौरे ने भारत को सीधे तौर पर इन चिंताओं को उठाने का मौका दिया।

इस कूटनीतिक चाल से पाकिस्तान के सरकारी और मीडिया गलियारों में तीव्र प्रतिक्रिया देखने को मिली। पाकिस्तान, जो लंबे समय से अफगानिस्तान में एक प्रमुख प्रभाव वाला देश रहा है, भारत और तालिबान के बीच सीधी वार्ता से असहज महसूस कर रहा है। तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव और राजनीतिक मनमुटाव के बीच, भारत की एंट्री ने क्षेत्रीय समीकरणों को और जटिल बना दिया है।

इसके अलावा, चीन भी अफगानिस्तान में खनिज खनन और विकास परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे यह क्षेत्र बहुपक्षीय कूटनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया है। भारत का यह कदम दिखाता है कि वह अफगानिस्तान में अपनी पारंपरिक पकड़ को पूरी तरह से नहीं छोड़ना चाहता और वह क्षेत्रीय भू-राजनीति में एक सक्रिय खिलाड़ी बना रहेगा। इस दौरे ने भविष्य में काबुल के साथ भारत के संबंधों की दिशा तय करने के लिए एक आधारशिला रखी है।