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धान खरीदी छत्तीसगढ़ 2025: हड़ताल के बीच समर्थन मूल्य पर कोरबा में धान खरीदी का शुभारंभ

कोरबा: खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का काम कोरबा में भी शुरू हो गया है. धान खरीदी की शुरूआत के बीच सरकारी समिति के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बने हुए हैं. दूसरी तरफ उनके स्थान पर कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि अधिकारियों की ड्यूटी खरीदी केंद्रों पर लगाई गई थी लेकिन वो भी उपार्जन केंद्रों में नहीं पहुंचे. ऐसी व्यवस्था के बीच भी मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा है कि कोई भी व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी. सुचारू रूप से धान खरीदी की प्रक्रिया चलती रहेगी. मंत्री ने कहा कि जिले के किसानों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है. लंबे इंतजार के बाद शासकीय खरीद केंद्रों में धान उपार्जन प्रक्रिया का आरंभ हुआ है.

सोनपुरी से शुरू हुई खरीदी: जिले में धान खरीदी की बोहनी आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित केंद्र सोनपुरी में हुई. यहां कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने धान खरीदी का विधिवत शुभारंभ किया. कैबिनेट मंत्री देवांगन ने इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन की पूजा-अर्चना कर खरीदी कार्य की शुरुआत की और कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्री देवांगन ने केंद्र में धान बेचने पहुंचे किसान फूलसिंह राठिया का माला पहनाकर स्वागत किया और आगामी खरीदी मौसम के लिए शुभकामनाएं दी.

हड़ताल जारी रही तो बढ़ेगी समस्या: सहकारी समितियों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं. उनके स्थान पर प्रशासन ने खाद्य विभाग के फूड इंस्पेक्टर, सहकारिता विभाग के इंस्पेक्टर और कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है. धान खरीदी के पहले दिन सहकारिता और फूड इंस्पेक्टर उपार्जन केंद्र में पहुंचे. लेकिन कृषि अधिकारी उपार्जन केंद्र में नहीं पहुंचे. कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों ने प्रशासन के निर्णय का विरोध किया था और अपनी ड्यूटी उपार्जन केंद्र में देने से इनकार किया था. जिसकी वजह से वो पहले दिन ही उपार्जन केंद्र में नहीं पहुंचे. सहकारी समिति के कर्मचारियों को धान खरीदी का अनुभव है. वह व्यवस्था बनाकर धान की खरीदी करते हैं, किसान द्वारा लाए गए धान को वह हमाल की व्यवस्था कर बोरे में पलटी करवाते हैं और फिर तौल कर इसे सुरक्षित रखवाते हैं. अन्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को धान खरीदी का उतना अनुभव नहीं है. इसलिए सहकारी समितियों के कर्मचारी यदि हड़ताल से वापस नहीं लौटे, तो व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.

इस मौके पर रामपुर विधायक फूलसिंह राठिया, कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, जिला स्तरीय अधिकारी, समिति के पदाधिकारी और किसान उपस्थित रहे. अधिकारियों ने बताया कि जिले के सभी उपार्जन केंद्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं. खरीदी कार्य की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी.