दूसरे दौर के मतदान के पूर्व सारी तैयारियां पूरी
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महिलाओं के तेवर पर टिका है बहुत कुछ
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युवाओं की सोच भी अपने भविष्य पर टिका
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प्रवासी मजदूर भी एकमुश्त वोट करते है
राष्ट्रीय खबर
पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मतदान समाप्त होने के बाद भी राजनीतिक बयानबाजी की गरमाहट कम नहीं हो रही है। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज़ हो गया है, क्योंकि सभी की निगाहें 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। महुआ सीट से चुनावी मैदान में उतरे जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने विश्वास जताया कि उनकी पार्टी 10-15 सीटों पर जीत हासिल कर मज़बूती से उभरेगी। सरकार कौन बनाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि 14 नवंबर को वोटों की गिनती के बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।
वहीं, गायघाट में एक व्यक्ति की मौत को लेकर गहरी राजनीति शुरू हो गई है। जहाँ प्रशासन ने इस घटना को अफवाह बताते हुए इस बात को सिरे से खारिज किया कि यह व्यक्ति को गलत जगह वोट डालने की सज़ा थी, वहीं चिराग पासवान ने इसे राजनीतिक हत्या करार दिया और इसके लिए राजद समर्थकों को दोषी ठहराया।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद संजय जायसवाल ने कांग्रेस के राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव पर केवल वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में राजद सांसद मनोज झा ने एनडीए पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नेताओं को केवल मतदान प्रतिशत नहीं, बल्कि जनता का मूड देखना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री पर बिहार में कट्टा पॉलिटिक्स करने का भी आरोप लगाया। इसी बीच, किशनगंज की एक रैली में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर सीधे-सीधे वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश को बाँटने में लगे हैं, जबकि इंडिया गठबंधन देश को जोड़ने की लड़ाई लड़ रहा है।
राजद नेता तेजस्वी यादव के चुनाव के बाद महागठबंधन की सरकार बनने के दावे पर बिहार के उप-मुख्यमंत्री और लखीसराय से भाजपा उम्मीदवार विजय कुमार सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तेजस्वी को जंगलराज का राजकुमार बताते हुए उन पर आरक्षण के नाम पर जातीय ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। सिन्हा ने दावा किया कि तेजस्वी की बेचैनी साफ़ दिखाई दे रही है, और 14 नवंबर को जनता का जनादेश उनके खिलाफ जाएगा। विजय सिन्हा को अपने ही इलाके में ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा था।
आम तौर पर, उच्च वोटर टर्नआउट को विपक्ष के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन इस बार बिहार के चुनावी माहौल पर नज़र डालने से पता चलता है कि यहाँ सत्ता-विरोधी (एंटी-इंकंबेंसी) लहर का कोई मजबूत आधार नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा वोट परिवर्तन के लिए है, जबकि महिला वोट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पक्ष में निर्णायक रहा है। युवा वोट तेजस्वी और पीके (प्रशांत किशोर) के बीच विभाजित हो सकता है। महिलाओं के मतदान प्रतिशत में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चुनाव शुरू तो तेजस्वी के पक्ष में हुआ था, लेकिन अंत तक आते-आते यह नीतीश कुमार पर केंद्रित हो गया। इसके अलावा, जो प्रवासी मजदूर वोट डालने के लिए वापस आए हैं, उनका वोट ज़्यादातर तेजस्वी के खाते में जाने का अनुमान है।