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इथेनॉल आरोप दरअसल शक्तिशाली लॉबी का काम: गडकरी

आरएसएस की अपनी जांच में पहले ही खुल गया था मामला

राष्ट्रीय खबर

नागपुरः केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार (29 सितंबर, 2025) को इथेनॉल मिलाने के संबंध में अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर उठे विवाद में पड़ने से इनकार करते हुए कहा कि यह उनके फैसलों से परेशान एक शक्तिशाली आयात लॉबी का काम है।

नागपुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए, मंत्री ने खुद की तुलना फल देने वाले पेड़ से की और कहा, मैं ऐसी आलोचनाओं का जवाब नहीं देता क्योंकि तब यह खबर बन जाती है। जिस पेड़ पर फल लगते हैं, लोग उसे पत्थर मारते हैं। बेहतर है कि हम इससे बचें। श्री गडकरी ने कहा कि उनकी नीति का फोकस इथेनॉल मिलाने को बढ़ावा देना, किसानों को ऊर्जा उत्पादक बनाना और प्रदूषण कम करना है। उन्होंने दावा किया कि इस नीति ने ईंधन आयात में निहित स्वार्थ रखने वालों को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाया है।

मंत्री ने कहा, जीवाश्म ईंधन के आयात के कारण लगभग 22 लाख करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे थे। उनके व्यवसाय प्रभावित हुए और वे नाराज़ होकर मेरे खिलाफ पेड न्यूज़ चलाने लगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, मैंने आज तक किसी भी ठेकेदार से एक पैसा भी नहीं लिया है और इसलिए ठेकेदार मुझसे डरते हैं।

श्री गडकरी ने कहा कि वह अपने काम पर ध्यान केंद्रित करेंगे और झूठे आरोपों से विचलित नहीं होंगे, जो राजनीति का आम और स्वाभाविक हिस्सा हैं। लोग जानते हैं कि सच्चाई क्या है, मैं पहले भी कई बार ऐसी परिस्थितियों से गुज़रा हूँ। केंद्रीय मंत्री के पुत्र निखिल गडकरी द्वारा संचालित कंपनी सीआईएएन एग्रो इंडस्ट्रीज, भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेट्रोल में 20 फीसद इथेनॉल मिलाने के आदेश के बाद से मुनाफे और राजस्व में नाटकीय वृद्धि को लेकर विवादों का केंद्र रही है।

कंपनी का राजस्व 17.47 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही) से बढ़कर 510.8 करोड़ रुपये (वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही) हो गया। मुनाफा भी लगभग नगण्य स्तर से बढ़कर ₹52 करोड़ से ज़्यादा हो गया, जिसका मुख्य कारण इथेनॉल मिश्रण में तेज़ी और नई सहायक कंपनियों में विस्तार था। सीआईएएन एग्रो का शेयर मूल्य भी सोमवार को बीएसई पर एक साल पहले के 172 से बढ़कर 2,023 रुपये हो गया। विश्लेषकों का कहना है कि यह वृद्धि केवल इथेनॉल की बिक्री से ही नहीं, बल्कि अन्य आय और नए व्यवसायों से भी हुई है।

दूसरी तरफ इस आरोप के अचानक चर्चा में आने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तरफ से भी मामले की छानबीन की गयी थी। सूत्रों की मानें तो दरअसल मीडिया में इस खबर को पेश करने वाले दरअसल अमित शाह और पियूष गोयल के करीबी लोगों के तौर पर पहचाने गये हैं। इससे भाजपा के अंदर जारी सत्ता संघर्ष की भी पुष्टि होती है।