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स्थायी शांति के लिए मुद्दों का समाधान जरूरी: राजनाथ

एससीओ की बैठक में कड़ा रुख प्रदर्शित करने के बाद चीन से कहा

  • चीनी रक्षा मंत्री से सीधी बातचीत की

  • सीमा के मुद्दों पर सुलझाना आवश्यक

  • पहलगाम हमले पर भी बातचीत हुई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन सीमा पर स्थायी शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने तथा तनाव कम करने के लिए सुव्यवस्थित तंत्र के माध्यम से लंबित जटिल मुद्दों को सुलझाने की जरूरत पर बल दिया है। श्री सिंह ने चीन के किंगदाओं में गुरूवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून के साथ द्विपक्षीय बैठक में स्थापित व्यवस्था को पुन: सक्रिय कर सीमा विवादों के स्थायी समाधान पर बल दिया।

रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को एक वक्तव्य जारी कर कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-चीन सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता पर गहन विचार-विमर्श किया। श्री सिंह ने द्विपक्षीय संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष प्रकट किया।

उन्होंने स्थायी संपर्क और तनाव कम करने के लिए सुव्यवस्थित तंत्र के माध्यम से जटिल मुद्दों के समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने सीमा प्रबंधन पर जोर दिया और इससे संबंधित स्थापित तंत्र को फिर से सक्रिय करते हुए सीमा विवादों के स्थायी हल का समर्थन किया। उन्होंने परस्पर लाभ के साथ-साथ एशिया और दुनिया में स्थिरता के लिए सहयोग बढाकर अच्छे माहौल की आवश्यकता पर भी बल दिया।

श्री सिंह ने जमीनी स्तर पर कदम उठाकर 2020 के सीमा गतिरोध के बाद बनें अविश्वास के माहौल को दूर करने का भी आह्वान किया। दोनों मंत्रियों ने मौजूदा व्यवस्थाओं के माध्यम से सैनिकों की वापसी, तनाव कम करने, सीमा प्रबंधन और अंतत: सीमांकन से संबंधित मुद्दों पर प्रगति हासिल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर परामर्श जारी रखने पर सहमति व्यक्त की

रक्षा मंत्री ने दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष होने की महत्वपूर्ण उपलब्धि पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने पांच वर्ष के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा के पुन: आरंभ होने की भी सराहना की। रक्षा मंत्री ने चीनी रक्षामंत्री को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर जघन्य आतंकवादी हमले और पाकिस्तान में आतंकवादी नेटवर्क को नष्ट करने के उद्देश्य से भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में भी जानकारी दी।