बांग्लादेश के साथ बिगड़े संबंध में मददगार बना इसरो
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः गहरे समुद्र में मछली पकड़ते समय अक्सर भारतीय मछुआरे गलती से बांग्लादेश की जलसीमा में घुस जाते हैं, जिसका उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ता है। लेकिन अब, इसरो ने एक नई तकनीक विकसित की है। इस तकनीक के दम पर हजारों ट्रॉलरों के मछुआरे ‘एक तीर से कई निशाने’ साधने के लिए तैयार हैं। आखिर क्या है इसरो की इस तकनीक की खासियत?
मत्स्य अधिकारियों के निर्देश पर, प्रत्येक ट्रॉलर में इसरो तकनीक से लैस ट्रांसपोंडर मशीन लगाई गई है। यह एक ही उपकरण कई मुश्किलों का समाधान करेगा। यह उन्नत तकनीक वाली मशीन किसी भी तूफान, बारिश या प्राकृतिक आपदा से पहले ही चेतावनी देगी। इस मशीन की मदद से मछुआरे सीधे गहरे समुद्र से प्रशासन, ट्रॉलर मालिकों और कई प्रमुख लोगों तक आपातकालीन संकेत पहुंचा सकेंगे।
जो मछुआरे गलती से बांग्लादेश की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं, उन्हें सीमा के करीब पहुँचने से पहले ही यह मशीन सतर्क कर देगी कि सामने बांग्लादेश की सीमा है और उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। मत्स्य विभाग की अनुमति के बाद, 15 जून से ट्रॉलर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकल चुके हैं।
14 जून से समुद्र में मछली पकड़ने पर लगा सरकारी प्रतिबंध हट गया है। इसके बाद सभी ट्रॉलर मछली पकड़ने के लिए गहरे समुद्र में निकले हैं। फिलहाल, इसकी जोरदार तैयारी चल रही है। इस समय कैनिंग, गोसाबा, बसंती, कुलतली, काकद्वीप सहित उपखंड के सभी मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों पर भारी व्यस्तता है। इसरो तकनीक से लैस यह उन्नत ट्रांसपोंडर मशीन मछुआरों का हौसला बढ़ा रही है।
गौरतलब है कि 15 अप्रैल से 14 जून तक समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। इस अवधि में मुख्य रूप से समुद्री मछलियों का प्रजनन काल होता है, जिसे ‘बैरेन पीरियड’ भी कहा जाता है। इसलिए मछुआरे ट्रॉलर की मरम्मत और अन्य विभिन्न कार्यों में व्यस्त रहते हैं। यह काम अब अपने अंतिम चरण में है।
मछुआरों का अनुमान है कि इस साल पिछले वर्षों की तुलना में अच्छी मात्रा में हिल्सा देखने को मिल सकती है। बाजार में मांग के अनुसार हिल्सा मछली उपलब्ध होगी। हालांकि, पूरा मामला अनुकूल मौसम पर निर्भर करेगा। अब मछुआरे उसी की ओर देख रहे हैं। मछुआरा संगठनों के सूत्रों से पता चला है कि मौसम की शुरुआत में 50 प्रतिशत ट्रॉलर मछली पकड़ने के लिए समुद्र में जाएंगे। अगर मछली अच्छी रही तो बाकी ट्रॉलर भी गहरे समुद्र में उतरेंगे।