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भारत का बाहुबली रॉकेट अब अंतरिक्ष तक जा पहुंचा

सबसे बड़े व्यापारिक उपग्रह को कक्षा में भेजा

  • इसरो का ऐतिहासिक कीर्तिमान

  • नब्बे सेकंड के विलंब से भेजा गया

  • भारी पेलोड और तकनीकी श्रेष्ठता

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। बुधवार, 24 दिसंबर 2025 की सुबह, भारत के सबसे शक्तिशाली रॉकेट एलवीएम 3-एम 6 ने अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के विशालकाय संचार उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को सफलतापूर्वक पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया। यह मिशन न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन है, बल्कि वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में भारत के बढ़ते प्रभुत्व का भी प्रमाण है।

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। प्रक्षेपण का समय पहले सुबह 8:54 बजे निर्धारित किया गया था। हालांकि, अंतिम क्षणों में इसरो के वैज्ञानिकों ने एक बेहद सतर्क रुख अपनाया। अंतरिक्ष में तैर रहे मलबे और अन्य उपग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करने के बाद, संभावित टकराव से बचने के लिए कंजंक्शन असेसमेंट के आधार पर लॉन्च में 90 सेकंड की देरी की गई।

अंततः सुबह 8:55:30 बजे, बाहुबली रॉकेट ने आग उगलते हुए बादलों को चीरकर अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरी। मिशन के ठीक 15 मिनट बाद, रॉकेट ने उपग्रह को उसकी सटीक कक्षा में छोड़ दिया।

यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है। ब्लूबर्ड-6 उपग्रह का कुल वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है, जो भारतीय धरती और भारतीय रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में ले जाया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है। इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने गर्व के साथ बताया कि यह उपग्रह की क्षमता और रॉकेट की शक्ति का एक अद्भुत मेल है।

इस उपग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डायरेक्ट-टू-सेल तकनीक है। यह नेक्स्ट-जेन संचार उपग्रह बिना किसी विशेष डिश या सिग्नल रिसीवर के, सीधे आम नागरिक के साधारण स्मार्टफोन पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा प्रदान करने में सक्षम है। यह तकनीक भविष्य में दुनिया के दुर्गम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्या को जड़ से खत्म कर सकती है।

इस सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह मिशन वैश्विक वाणिज्यिक बाजार में भारत की विश्वसनीयता को नई ऊंचाइयों पर ले गया है।

भारत अब केवल अपने उपग्रह ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे विकसित देशों के भारी-भरकम उपग्रहों को भी किफ़ायती और सटीक तरीके से लॉन्च करने का केंद्र बन गया है।लॉन्च के समय मौजूद विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीहरिकोटा के ऊपर अंतरिक्ष में बढ़ती भीड़ के बावजूद इसरो की यह सटीक लैंडिंग और समय प्रबंधन भारतीय इंजीनियरिंग की परिपक्वता को दर्शाता है।