तुर्किए में युद्धविराम वार्ता के पहले चरण के बाद भी
कियेबः यूक्रेन में युद्ध लगातार जारी है, और पूर्वी मोर्चे पर रूसी सेना का दबाव बढ़ता दिख रहा है। डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों में, जिसे डोनबास के नाम से जाना जाता है, भीषण लड़ाई जारी है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रूसी सेना ने कई छोटे शहरों और कस्बों पर नियंत्रण कर लिया है, जिससे यूक्रेनी बलों के लिए रणनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं।
पश्चिमी देशों द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य सहायता लगातार जारी है, जिसमें उन्नत हथियार प्रणालियां और गोला-बारूद शामिल हैं। हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अधिक वायु रक्षा प्रणालियों और लंबी दूरी की मिसाइलों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। रूस का दावा है कि उनका ‘विशेष सैन्य अभियान’ योजना के अनुसार चल रहा है और वे यूक्रेन के “विसैन्यीकरण” और “नाजियों से मुक्ति” के अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेंगे।
दूसरी ओर, यूक्रेन और उसके सहयोगी इसे एक अकारण आक्रामकता और अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानते हैं। इस युद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और यूरोप में मानवीय संकट गहरा गया है। ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर इसके प्रभाव के कारण अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है। राजनयिक प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो पाया है, और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध अभी लंबा चल सकता है, और इसके भू-राजनीतिक परिणाम दूरगामी होंगे।
यूक्रेन के सहयोगी देश उसकी हथियारों से मदद करना जारी रखे हुए हैं। चिंता का विषय यह है कि नाटो के तमाम सदस्य देशों की युद्ध संबंधी मदद के बाद भी यह सब कुछ रूसी ताकत के आगे कमजोर पड़ रही है। दूसरी तरफ अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देशों द्वारा उपलब्ध कराये गये युद्ध उपकरण के बाद भी रूस के मिसाइल और ड्रोन लगातार यूक्रेन के तमाम ठिकानों पर हमला कर रहे हैं।