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मुर्शिदाबाद दंगा पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख कायम

केंद्रीय बल वहां अभी मौजूद रहेंगे

  • वहां बीएसएफ की स्थायी शिविर बनें

  • राज्य अतिरिक्त पुलिस बल बहाल करें

  • मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा है कि केंद्रीय सशस्त्र बल अगले आदेश तक अशांत शमशेरगंज और धुलियान में रहेंगे और न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को और अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि अगर राज्य के पास पर्याप्त बल होते तो हिंसा को टाला जा सकता था।

न्यायमूर्ति सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और राज्य दोनों को शमशेरगंज और धुलियान में एक स्थायी सीमा सुरक्षा बल शिविर स्थापित करने पर विचार करने के लिए कहा, ताकि उन क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके जहां गत 11-12 अप्रैल को सांप्रदायिक दंगों में तीन लोगों की मौत हो गई थी तथा दुकानों और घरों में लूटपाट किया गया था।

गुरुवार को आदेश जारी करने के बाद, न्यायाधीशों ने मामले को अपने अधिकार क्षेत्र से मुक्त कर दिया और इसे मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगननम को भेज दिया ताकि दूसरे खंडपीठ के लिए भेजा जा सके। पीठ में दूसरे न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी भी शामिल थे। मुख्य न्यायाधीश ने 12 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी नेता शुभेंदु अधिकारी की याचिका के बाद उसकी सुनवाई के लिए पीठ आवंटित की थी।

न्यायमूर्ति सौमेन सेन और न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी की खंडपीठ ने अधिकारी और भाजपा के एक पदाधिकारी अधिवक्ता तरुण ज्योति तिवारी की याचिका के आधार पर मामले की सुनवाई की। जिसे मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगननम ने 12 अप्रैल को साप्ताहिक अदालती अवकाश के दिन तत्काल गठित किया था ।

न्यायाधीशों ने कहा कि अब समय आ गया है कि राज्य पर्याप्त पुलिस बल की भर्ती पर विचार करे। उच्च न्यायालय ने कहा कि मुर्शिदाबाद में पुलिस बल भी बहुत कम है और यदि पर्याप्त पुलिस कर्मी होते तो मुर्शिदाबाद में स्थिति को नियंत्रण किया जा सकता था। इस मामले में अगली सुनवाई 30 जुलाई को मुकर्रर की गयी है।

अदालत द्वारा नियुक्त समिति द्वारा दायर रिपोर्ट में मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा की भयावहता को दर्शाया गया है, जिसके कारण संपत्तियों को व्यापक नुकसान पहुंचा है और असहाय पीड़ितों की आजीविका छिन गई है। शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा,समिति ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया है कि विध्वंसकारी ताकतों ने पीड़ितों की अचल संपत्तियों को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया है।

धार्मिक स्थलों को भी नहीं बख्शा गया।  नंदीग्राम विधायक ने कहा, मैं न्यायालय के आदेश का स्वागत करता हूं। विफल पुलिस बल सहित बंगाल के लोगों को अपनी गहरी निद्रा से जागना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हों।