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माइक तोड़ने वाले विधायक निलंबित

  • हंगामे के बीच विपक्ष का वर्हिगमन

  • भाजपा विधायक लखेंद्र ने माइक तोड़ा

  • विपक्ष का आरोप उन्हें उकसाया गया

पटना: बिहार विधानसभा में माइक तोड़ने के आरोप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक लखेंद्र कुमार रौशन को आज से दो दिनों के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया।

विधानसभा में भोजनावकाश के बाद संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने प्रस्ताव पेश किया कि पातेपुर विधानसभा क्षेत्र के सदस्य लखेंद्र कुमार रौशन को सदन की कार्यवाही को बाधित करने और माइक तोड़ने के कारण आज के उपवेशन से लेकर दो दिनों तक के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित किया जाए।

इसके बाद सभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किए जाने की घोषणा की। सदन से श्री रौशन को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित होने के विरोध में भाजपा के सदस्य शोरगुल और नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आज भोजनावकाश से पूर्व प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के लखेंद्र कुमार रौशन का समाज कल्याण विभाग से संबंधित प्रश्न था। संबंधित मंत्री ने सरकार की जानकारी के मुताबिक संतोषजनक जवाब दिया।

उसके बाद दो-तीन पूरक प्रश्न भी पूछे गए और उसका भी मंत्री ने यथासंभव संतुष्टि लायक उत्तर दिया, फिर भी श्री रौशन लगातार पूरक प्रश्न पूछना चाह रहे थे लेकिन आसन उसकी इजाजत नहीं देना चाह रहा था फिर भी वह इस पर जोर दे रहे थे और अंत में जब आसन ने उसी दल के वरिष्ठ सदस्य को अगले प्रश्न के लिए नाम पुकारा तो मन में विरोध होना स्वाभाविक है लेकिन सदन में विरोध की भी एक सीमा होती है।

हम सब ने देखा है कि जिस ढंग से श्री रौशन ने आपत्तिजनक तरीके से विरोध में या गुस्सा के भाव में माइक को तोड़ दिया, यह न सिर्फ असंसदीय आचरण है बल्कि आसन और सदन का अपमान भी है ।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन अच्छे तरीके से चले इसकी जिम्मेवारी प्रतिपक्ष के साथ सत्ता पक्ष की भी है । सदन का चलना लोकतंत्र के लिए बहुत आवश्यक है लेकिन जब विपक्ष के सदस्य प्रश्न कर रहे हैं या पूरक प्रश्न पूछ रहे होते हैं तो माइक बीच में बंद कर दिया जाता है । ऐसा सदस्यों के साथ क्या उनके साथ भी होता है।

जब भी कोई ऐसा गंभीर विषय होता है जिस पर सरकार असहज स्थिति में होती है तो माइक बंद कर दिया जाता है। श्री सिन्हा ने कहा कि श्री रौशन भी आज जब माइक बंद होने पर उसमें तकनीकी खराबी के बारे में बोल रहे थे तभी माइक का ऊपर का हिस्सा खुल गया। उसी दौरान बगल से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा माले) के सत्यदेव राम ने उनके लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया।

सत्ताधारी दल के कई सदस्य इसके बाद सदन के बीच में आ गए लेकिन विपक्ष के सदस्य उस समय तक सदन के बीच में नहीं आए थे । यह उस समय के वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष का एक भी सदस्य पहले सदन के बीच में नहीं गया । सत्ता पक्ष के ही सदस्य सदन के बीच में आकर अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे और धमकी दे रहे थे ।

उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष के लोग कायर नहीं हैं कि कोई धमकी दे और अपशब्द बोले और हम उसे स्वीकार कर लें । यह व्यवस्था कतई स्वीकार नहीं होगी । इसी दौरान उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव भी कुछ कहने के लिए खड़े हुए और नेता प्रतिपक्ष को बैठने का इशारा किया तब नेता प्रतिपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा, उपमुख्यमंत्री तय नहीं करेंगे कि मैं कितनी देर तक सदन में बोलूं।

जब मैं सभा अध्यक्ष था तब मैंने प्रतिपक्ष के लोगों को पूरा सम्मान दिया था लेकिन उस समय प्रतिपक्ष के लोगों ने जो अब सत्ता में हैं आसन को अपने जूते से रौंदा था । उससे संबंधित प्रतिवेदन आप (सभा अध्यक्ष) सभा पटल पर रखने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं । सदन में यदि अनुशासन रखना है तो जिन लोगों ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया है उन्हें भी माफी मांगनी चाहिए । सदन में एकपक्षीय व्यवस्था कतई नहीं बननी चाहिए, लोकतंत्र की यही मर्यादा है।