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हरा धूमकेतु का हाल देख हैरान हो रहे हैं खगोल वैज्ञानिक

  • कई हजार वर्षों के बाद इस इलाके में लौटा है

  • फरवरी के पहले सप्ताह खुली आंखों से दिखेगा

  • यहां के सौर कणों का शायद असर दिख रहा है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः हरे रंग की अनूठी धूमकेतु की हाल की स्थिति पर खगोल वैज्ञानिक हैरान हो रहे हैं। हरे रंग का धूमकेतु हर वैज्ञानिक पहली बार देख रहा है। दूसरी तरफ यह भी पता चल गया है कि वर्तमान मानव प्रजाति के विकसित होने के पूर्व यह धूमकेतु एक बार चक्कर लगा गया था।

इस वजह से इस प्राचीन धूमकेतु को लेकर कई किस्म की जिज्ञासा वैज्ञानिकों के मन में है। खगोल दूरबीनों से इसकी गतिविधियों पर नजर रखने वालों को इसकी पूछ के लगातार लंबा होते जाने की जानकारी मिली है। इसी आधार पर यह संदेह व्यक्त किया गया है कि क्या यह हमारे सौरमंडल के चारों तरफ मौजूद सौर कणों की वजह से अपना आकार खो रहा है।

जिस इलाके से यह गुजर रहा है वहां पर सौर तूफान का भी दौर चल रहा है। इस धूमकेतु का वैज्ञानिक नाम जेडटीएफ सी 2022 ई3 रखा गया है। यह सूर्य की तरफ से आते हुए धरती के करीब पहुंच रहा है। धरती के करीब से गुजरता हुआ यह अपने बहुत बड़ी धुरी की तरफ से फिर से हमारे सौर मंडल से बाहर निकल जाएगा।

गत 17 जनवरी को जब इसकी तस्वीर एक खगोल वैज्ञानिक ने ली तो उसकी पूछ पहले के मुकाबले बहुत अधिक लंबी नजर आयी। आम तौर पर अत्यंत तेज गति से गुजरते इन खगोलीय पिंडों के गुजरने के दौरान आस पास के सौर कण भी आवेशित हो जाते हैं।

इसी वजह से वे चमकते हुए एक पूछ की शक्ल देते हैं। इस धूमकेतु के पीछे का यह हिस्सा ही मूल आकार से अलग होता हुआ दिख रहा है। समझा जाता है कि अभी हाल ही में सूर्य में जो सौर तूफान उभरा था, उसके प्रभाव में यह धूमकेतु आने की वजह से ऐसा हो रहा है।

पिछले वर्ष इसे पहली बार जब देखा गया तभी यह पता चला कि यह जिस धुरी पर चलता है, उसके मुताबिक यह एक बार पहले भी इसी धुरी पर तब गुजरा था जब धरती पर पत्थर युग चल रहा था। पहली बार इस पर नजर आने के बाद यह माना गया था कि यह एक और उल्कापिंड है लेकिन बाद में यह आकलन गलत साबित हुआ। आकलन के मुताबिक यह हर पचास हजार वर्षों में एक बार इस रास्ते से गुजरता है। इस बार फिर से उसके गुजरने के बाद उसकी पूंछ का हिस्सा लंबा नजर आ रहा है।