Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lucknow Aliganj Fire Case: कोचिंग सेंटर अग्निकांड में 15 की मौत; जानिए क्या हैं दोषियों पर लगी कानून... JD Vance Pakistan Statement: पाकिस्तान पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान से गरमाई राजनीति; रिपब्लिकन स... Crude Oil Price Crash: कच्चे तेल की कीमतों में 5% की बड़ी गिरावट; क्या भारत में सस्ते होंगे पेट्रोल-ड... Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये काम, वरना छिन जाएगा व्रत का पूरा पु... Hrithik Roshan in Jailer 2: चेन्नई में शूट करेंगे स्पेशल कैमियो? 'जेलर 2' के लेटेस्ट अपडेट ने बढ़ाई फ... Japan PM Sanae Takaichi India Visit: जापान की पीएम ताकाइची आएंगी गुवाहाटी; पीएम मोदी के साथ होगी साल... FIFA World Cup 2026: मेसी बनाम एम्बाप्पे; गोल्डन बूट और सबसे ज्यादा गोल के रिकॉर्ड के लिए सीधी टक्कर Dry Fruits in Summer: गर्मी में ड्राई फ्रूट्स खाने का सही तरीका; जानें किन सूखे मेवों से बचें और क्य... WhatsApp New Features: व्हाट्सऐप पर जल्द आएंगे ये कमाल के फीचर्स; स्कैम अलर्ट से लेकर मैसेज शेड्यूलि... Weather Update Today: दिल्ली में फिर बढ़ेगा गर्मी का सितम, जानिए देश के बाकी राज्यों में मॉनसून और बा...

स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने ऑक्टोपस की बेहतर नकल की

#स्टैनफोर्ड #विज्ञानसमाचार #ऑक्टोपससामग्री #नैनोतकनीक #आर्टिफिशियलइंटेलिजेंस #StanfordScience #Biomimicry #ShapeShiftingMaterial #Nanotechnology #FutureTech

यह पदार्थ रंग और बनावट बदल लेता है

  • भविष्य के छलावरण की तकनीक

  • कपड़ों में भी इस गुण को ढालेंगे

  • थ्री डी तकनीक से तैयार किया गया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अष्टबाहु (ऑक्टोपस) और कटीश (कटलफिश) अपने परिवेश में पूरी तरह घुलमिल जाने की अद्भुत क्षमता के लिए जाने जाते हैं। वे पलक झपकते ही अपनी त्वचा का रंग और बनावट (टेक्सचर) बदल सकते हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से मानव निर्मित सामग्रियों में इस प्राकृतिक महारत की नकल करने की कोशिश कर रहे थे। अब, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। नेचर पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, उन्होंने एक ऐसा लचीला पदार्थ विकसित किया है जो मानव बाल से भी सूक्ष्म स्तर पर अपनी सतह के पैटर्न और रंग बदल सकता है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

स्टैनफोर्ड में सामग्री विज्ञान के डॉक्टरेट छात्र और इस शोध के मुख्य लेखक सिद्धार्थ दोषी ने बताया कि वस्तुओं को देखने और महसूस करने के अनुभव में बनावट की अहम भूमिका होती है। अष्टबाहु जैसे जीव माइक्रोन स्केल (बेहद सूक्ष्म) पर अपने शरीर को बदल सकते हैं। अब इस नई तकनीक के माध्यम से वैज्ञानिक भी किसी पदार्थ की स्थलाकृति (टोपोग्राफी) और उससे जुड़े दृश्य गुणों को उसी सूक्ष्म स्तर पर नियंत्रित करने में सक्षम हैं।

यह नवाचार भविष्य में इंसानों और रोबोटों के लिए बेहतर छलावरण (कैमौफ्लॉज) प्रणाली, पहनने योग्य उपकरणों (वियरेबल डिवाइसेस) के लिए रंग बदलने वाले डिस्प्ले और नैनोफोटोनिक्स के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है।

इस गिरगिट जैसे पदार्थ को बनाने के लिए टीम ने इलेक्ट्रॉन-बीम लिथोग्राफी (जिसका उपयोग सेमीकंडक्टर बनाने में होता है) को एक जल-संवेदनशील पॉलिमर फिल्म के साथ जोड़ा। जब इस फिल्म पर इलेक्ट्रॉनों की बौछार की जाती है, तो इसके विशिष्ट हिस्से पानी सोखने की क्षमता बदल लेते हैं। गीला होने पर, ये हिस्से अलग-अलग तरह से फूलते हैं, जिससे जटिल पैटर्न उभर आते हैं जो सूखने पर गायब हो जाते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि यह खोज एक आकस्मिक प्रयोग का परिणाम थी। सिद्धार्थ दोषी एक पुराने प्रयोग के नमूनों का पुन: उपयोग कर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि इलेक्ट्रॉन बीम के संपर्क में आए हिस्से अलग तरह से व्यवहार कर रहे थे और रंग बदल रहे थे।

इस तकनीक की सटीकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शोधकर्ताओं ने योसेमाइट के एल कैपिटन पर्वत का एक सूक्ष्म थ्री डी संस्करण बनाया, जो केवल पानी डालने पर उभरता है। सामग्री के फूलने की मात्रा को नियंत्रित करके, वैज्ञानिक प्रकाश के परावर्तन को बदल सकते हैं, जिससे सतह को ग्लॉसी (चमकदार) या मैट लुक दिया जा सकता है। इसमें धातु की पतली परतें जोड़कर जीवंत रंग भी उत्पन्न किए जा सकते हैं।

वर्तमान में, इस प्रक्रिया को पृष्ठभूमि से मिलाने के लिए मैन्युअल सुधार की आवश्यकता होती है, लेकिन टीम इसे भविष्य में AI और कंप्यूटर विजन के साथ जोड़ने की योजना बना रही है। इससे यह पदार्थ बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के, वास्तविक समय में अपने आसपास के वातावरण के अनुसार खुद को ढाल सकेगा।