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भारतीय महिला सैनिकों का जत्था शांति सैनिक के तौर पर

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः शांति सैनिक के तौर पर सबसे बड़ा दल भारतीय महिला सैनिकों का लाईबेरियाजा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों के तौर पर यह सबसे बड़ा भारतीय सैन्य दल है, जिसमें सिर्फ महिलाएं हैं। लाईबेरिया में वर्ष 2007 से ही संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना तैनात है। इसमें पहली बार भारतीय सेना की महिला टुकड़ी को भेजा जा रहा है।

इसके पहले वहां कभी महिला सैनिकों को तैनात नहीं किया गया था। सूडान के अबेयेई इलाके में इन प्रशिक्षित महिला सैनिकों को तैनात किया जाएगा। लाईबेरिया के इलाके को लगातार संयुक्त राष्ट्र का यह सैनिक समर्थन प्राप्त है। इस बार वहां तैनात होने वाले शांति सैनिक दूसरे किस्म की भूमिका निभायेंगे।

यह दल वहां चौबीस घंटे की गार्ड की जिम्मेदारी निभाने के साथ साथ राजधानी मोनरोविया में गश्त भी लगायेगा। इसके अलावा दल पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी वहां की पुलिस को प्रशिक्षण देने की होगी।

भारतीय सेना की इस टुकड़ी में दो अफसर और 25 जूनियर अफसर होंगे। माना जा रहा है कि हिंसा प्रभावित इस इलाके में महिलाओं को बच्चों को राहत पहुंचाने के लिए इसकी बड़ी भूमिका होगी। वहां का माहौल लगातार हिंसक ही रहा है। इसी वजह से अब इलाके में रहने वालों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र को अलग तरीके से कोशिश करनी पड़ रही है।

हिंसा की वजह से वहां से हजारों लोगों का पलायन भी हो चुका है। इस बार उत्तर और दक्षिण के बीच टकराव के इल इलाके में मानवीय सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के शांति सेना की है। इसलिए भारतीय महिला सैनिकों का यह जत्था उसमें ज्यादा कारगर साबित होगा, ऐसा माना जा रहा है क्योंकि वहां की महिलाओँ से वे सीधे संपर्क और बात चीत कर सकेंगी।

हाल के दिनों में आपस में टकराव करने वाले हथियारबंद समूह सूडान पीपल्स लिबरेशन मुवमेंट और वहां की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की पहल पर एक समझौता किया है। इसमें कई इलाकों को सैन्य उपस्थिति से मुक्त करने पर सहमति बनी है। इसके लिए इथोपिया की सेना वहां की स्थिति की निगरानी करेगी।

शेष जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिक निभायेंगे। बता दें कि भारतीय सेना के दो लाख से अधिक सैनिकों ने संयुक्त राष्ट्र के 49 ऐसे अभियानों में अपनी जिम्मेदारी निभायी है। भारतीय सेना के अनुशासन और आचरण की इस वजह से पूरी दुनिया में तारीफ भी हुई है।